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आदिवासियों का अस्तत्वि खतरे में : कृष्णा हांसदा

आदिवासियों का अस्तत्वि खतरे में : कृष्णा हांसदा

सरकार को आखिरकार सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन की क्या जरूरत पड़ी? इस संशोधन से आदिवासियों एवं सरकार को क्या कुछ फायदा होगा? ऐसे कई सवाल उठाते हुए आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हांसदा ने कहा कि इसपर गहन मंथन की जरूरत है। एक्ट में संशोधन आदिवासी समाज के लिए काफी खतरनाक होगा। विरोध नहीं हुआ तो आदिवासियों का ही अस्तित्व समाप्त होने का खतरा है।

हांसदा रविवार को घाटशिला कॉलेज में झारखंड छात्र मोर्चा द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन विषय पर आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। कहा, संशोधन के बाद यदि हम अपनी जमीन किसी को लीज पर देंगे तो एक अदद प्रमाणपत्र बनवाने को तरसना पड़ेगा। अशिक्षा एवं पिछड़ेपन के कारण आदिवासी अपने अधिकारों के बारे में नहीं जानते हैं।

संशोधन को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति में हैं। एकजुट होकर करें विधेयक का विरोध : उन्होंने कहा कि आदिवासियों को एकजुट होकर संशोधन विधेयक का विरोध करने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह संशोधन कर आदिवासियों को कमजोर करना चाहती है, ताकि हम विरोध करने की स्थिति में न रहें। सेमिनार में जिला उपाध्यक्ष इन्द्रो मुर्मू, भगत हांसदा, दासमत किस्कू, गौरी मुर्मू, सुकेश मुर्मू , बुढ़ान हांसदा, अर्जुन हेम्ब्रम, रामचंद्र हांसदा आदि ने भी अपने विचार रखते हुए इसके लिए सबको एकजुट होने की बात कही।

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  • Web Title:The existence of tribals in danger: Krishna Hansda
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