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दुष्कर्म के 100 आरोपियों के इंटरव्यू ने मधुमिता की सोच बदल दी

मधुमिता की सोच बदल दी

भारत में दुष्कर्म के बढ़ते मामलों के बीच 26 साल की मधुमिता ने इन अपराधों को अंजाम देने वालों की जिंदगी खंगालने की कोशिश की। उन्होंने दुष्कर्म के सौ से ज्यादा दोषियों का साक्षात्कार किया और इस अभियान ने ऐसे अपराधियों के प्रति उनकी सोच बदल दी। 

ब्रिटेन की एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी में अपराधशात्र विभाग की शोध छात्रा मधुमिता का कहना है कि ज्यादातर दुष्कर्म के इन दोषियों को शैतान समझते हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मधुमिता ने निर्भया गैंगरेप के बाद 2013 में पहला इंटरव्यू दिल्ली की तिहाड़ जेल में किया। निर्भया कांड के बाद देशवासियों का गुस्सा सड़कों पर उतरा था। 

मधुमिता ने जानने की कोशिश की पुरुष ऐसा क्यों करते हैं। क्या परिस्थितियां उन्हें ऐसे अपराध के लिए मजबूर करती हैं। मधुमिता ने पाया कि दुष्कर्म के दोषी ज्यादातर पुरुष अशिक्षित थे। ज्यादातर ने कक्षा तीन-चार के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी और थोड़े बहुत ही हाईस्कूल या ग्रेजुएट तक पढ़े हुए थे। मधुमिता का कहना है कि भारतीय समाज की प्रवृत्तियां बेहद संकीर्ण हैं। यौन शिक्षा न तो स्कूलों का हिस्सा है और न परिवारों का। उन्होंने सवाल दागा कि अगर हम इन बच्चों को यौन अपराधों के बारे में नहीं बताएंगे तो वह कैसे अच्छाई-बुराई को समझेंगे। 

अजीबोगरीब उदाहरण सामने आया

मधुमिता ने पांच साल की बच्ची से रेप करने वाले 49 साल के एक सजायाफ्ता शख्स से बातचीत की तो उसने अजीबोगरीब बातें कहीं। उस शख्स ने माना कि उसने उस लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी, अब कोई शादी नहीं करेगा। लेकिन वह यह भी बोला कि रिहा होने पर वह उस लड़की को अपनाएगा और उससे शादी भी करेगा। जब मधुमिता ने उस लड़की के परिवारवालों से बात की तो पता चला कि पीड़िता को पता भी नहीं है कि उससे दुष्कर्म करने वाला जेल में है। 

समाज और परिवार भी जिम्मेदार

1. आम सहमति से यौन संबंधों की जानकारी नहीं

दुष्कर्म के दोषियों से बात कर उन्होंने पाया कि पालन-पोषण और उनके आसपास के लोगों की सोच का अपराधियों पर सीधा असर था। पुरुष प्रधान समाज में पले-बढ़े इन युवकों की सोच भी ऐसे आम इंसानों जैसी थी, जिसने गलत रास्ता अख्तियार कर लिया। शोधार्थी का कहना है कि इन युवकों को अहसास ही नहीं है कि उन्होंने जो किया वह दुष्कर्म है। आम सहमति से यौन संबंध बनाने को लेकर उनकी कोई समझ नहीं है। 

2. परिवार में महिलाओं के प्रति सम्मान नहीं

मधुमिता ने दुष्कर्म के दोषियों की बातचीत से निष्कर्ष निकाला कि आम भारतीय परिवारों में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है। यहां तक कि पति का नाम लेना भी गलत माना जाता है। पारिवारिक मसलों में उनकी राय कोई मायने नहीं रखती और यही सोच बच्चों में भी पनपती है और वे महिलाओं को एक उपभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं समझते। 
 

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  • Web Title:Woman who interviewed more than 100 rape convicts
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