शुक्रवार, 03 सितम्बर, 2010 | 14:59 | IST
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निजीकरण क्यों जरूरी है, पेश है इसकी एक बानगी। खेलों के लिए सरकार ने भिखारियों को तड़ीपार करने की योजना बनाई। आगे पढे
 
एक ग्राहक ने चारपाई खरीदी। जब डिलीवरी हुई तो चारपाई में तीन पाए ही थे। पूछने पर दुकानदार ने कहा- चौथे पाए की बात सौदे में नहीं थी, सो इसे आपको अलग से खरीदना होगा। आगे पढे
 
ये डेंगू के मच्छर वाकई नामुराद हैं। इनमें देशभक्ति की भावना तो नहीं ही थी, मेहमाननवाजी की परंपरा का भी ख्याल नहीं रखा। बेचारों को डरा दिया। आगे पढे
 
लो, मंगलाचरण में भी विघ्न। कॉमनवेल्थ गेम के गड़बड़झाले का साया थीम सांग पर भी आ पड़ा। वैसे, जारी होते ही आम हो गया कि यह हमारी संगीत परंपरा का नहीं। आगे पढे
 
रविवार को साइक्लिंग प्रतियोगिता हुई। इसका रूट ऐन मौके बदलना पड़ा। कारण- पहले वाला रूट खेलों की तैयारी की पूरी कहानी कह रहा था। आगे पढे
 
 
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोई। जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय। कॉमनवेल्थ की तैयारी के मामले में खेल मंत्री गिल साहब पहले ही ईश्वर की शरण में जा चुके हैं। आगे पढे
 
किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन करना पड़ा। कारण जमीन का अधिग्रहण और समुचित मुआवजे का न मिलना है। विभिन्न पार्टियों ने उनके आंदोलन का समर्थन किया। लेकिन किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। आगे पढे
 
कॉमनवेल्थ की मेजबानी करने को तैयार डूबती- उतराती राजधानी के बीच जिस तरह से समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है उससे तो लगता है कि समाधान दिल्ली के लिए अभी बहुत दूर है। आगे पढे
 
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इस मौके पर राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों से पुरजोर अपील की है कि वे जनगणना-2011 और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की तैयारी में पूर्ण सहयोग करें।
शूटिंग रेंज की जमीन धंस गई। खबर नई पर कहानी पुरानी और जानी-पहचानी भी। कॉमनवेल्थ की तैयारी बंबइया फिल्म के अंतिम 15 मिनट जैसी हो गई है। एक समस्या खत्म हुई नहीं कि दूसरी शुरू। आगे पढे
 
भाइयों के लिए बहनों के त्याग की कहानियां और किस्से तो हमने खूब सुने हैं। लेकिन बहनों के लिए त्याग के यादगार मामले हमारे समाज में अब भी सिरे से गायब हैं। आगे पढे
 
करेला और ऊपर से नीम चढ़ा। दिल्ली की हालत कुछ ऐसी ही है। कॉमनवेल्थ की तैयारी को जैसे-तैसे पूरा करने की जद्दोजहद चल ही रही थी कि बदरा विलेन बनकर आ खड़े हुए। आगे पढे
 
शुक्रवार को दिलशाद गार्डन के एक स्कूल में भरे पानी में करंट उतर जाने से एक छात्र की मौत हो गई। पिछले साल सितम्बर में खजूरी खास के एक स्कूल में पानी में करंट की अफवाह फैली। आगे पढे
 
अखबारों में फेनेल का उतरा हुआ चेहरा अनायास ही नहीं है। गुरुवार को औसत बारिश से राजधानी में 11 मकान गिरे, कई जगहों पर सड़कें धंसीं। आगे पढे
 
दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने की धुन कहें या सनक। इसके लिए सड़कों से साइकिल, रिक्शा यानी बिना मोटर के वाहनों को हटाया जा रहा है। आगे पढे
 
भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलन होते रहे हैं। अब प्रणव ने संसद में भरोसा दिया कि कानून बदलेंगे और किसानों के हितों का ध्यान रखेंगे। आगे पढे
 
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