मंगलवार, 02 सितम्बर, 2014 | 22:12 | IST
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हम सब कुछ मनचाहा पाकर भी वह खुशी नहीं हासिल कर पाते, जिसकी हमें तलाश होती है या फिर हमें यह पता नहीं होता कि सच में हम क्या पाना चाहते हैं? आगे पढे
 
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में संसद के सामने चौक पर दो धरने साथ-साथ चल रहे हैं। इमरान का मुक्ति धरना, जो नया पाकिस्तान बनाना चाहता है। आगे पढे
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग की विदाई की घोषणा कर दी है। उनकी अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार उन सारी नीतियों से मुक्ति की तरफ बढ़ रही है, जिनसे इस देश का पिछले छह दशक का राजकाज चला। आगे पढे
 
भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) ने एक रिपोर्ट में बताया है कि 2018-19 तक भारत का निर्यात 750 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। आगे पढे
 
इधर पता नहीं क्यों, क्रिकेट का बुखार उतर-सा गया है। शायद इसलिए कि अब सचिन तेंदुलकर क्रिकेट नहीं खेलते। गलियों में बच्चों ने भी क्रिकेट खेलना बंद ही कर दिया है। वे फुटबॉल खेलते हैं। आगे पढे
 
 
बहुत मायूस थे वह। अपनी अहमियत चूकती हुई नजर आ रही थी उन्हें। उन्हें जानने वाले लोग गिने-चुने थे और उन लोगों के बीच भी उनकी अहमियत ज्यादा नहीं थी। आगे पढे
 
ऐसा दौर है, जहां विचारहीनता भी एक मूल्य है। विचारों से परहेज करने वाली एक पीढ़ी सामने है। संघर्ष, तकलीफ और यातना, सामूहिक संवेदना नहीं जगातीं, वे पीड़ित तक सीमित रह गई हैं। आगे पढे
 
तेलंगाना और आंध्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से दोनों ही सूबों को फायदा होगा, पर तंग नजरिया उन्हें केवल नुकसान पहुंचाएगा। आगे पढे
 
टोमैटो फेस्टिवल चीन के शेनयांग में आयोजित टोमैटो फेस्टिवल के दौरान मस्ती करते लोग। इस टोमैटो फेस्टिवल में लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया। चीन के शेनयांग में आयोजित टोमैटो फेस्टिवल के दौरान मस्ती करते लोग। इस टोमैटो फेस्टिवल में लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया। अन्य फोटो
राहत-मुआवजे की जितनी राशि अब तक बंटी है, उससे बाढ़ रोकने का पुख्ता इंतजाम हो सकता था। आगे पढे
 
सनातनी घरों में रामचरितमानस का सम्मानित स्थान होता है, महाभारत का नहीं। बचपन से हम निष्काम कर्म से अनजान हैं। इक्कीसवीं सदी में तो और दुर्दशा है। यह दर्शन-प्रदर्शन का युग है। आगे पढे
 
बांकेई महान जेन गुरु थे। वह गुजर गए, तो हजारों शिष्य इकट्ठे हुए। उनमें एक अंधा भी था, जो बार-बार कहने लगा कि बांकेई सचमुच बहुत महान आदमी था। आगे पढे
 
पहली मुलाकात के पूर्व एक और मुलाकात हो चुकी थी अनंतमूर्ति से। संस्कार के जरिये। पोंगापंथियों के अग्रहार पर अनंत का हमला उग्र नहीं है, न ही उत्तेजक। आगे पढे
 
नवाज शरीफ जब से दिल्ली से लौटे हैं, तब से हमारी सीमाएं अशांत हैं। आईएसआई द्वारा पोषित हाफिज सईद अपनी मांद से निकलकर गुर्रा रहा है। खुद नवाज की सत्ता को सीधी चुनौती दी जा रही है। संदेश साफ है। पाकिस्तान का दोस्ती की राह पर चलना आसान नहीं है। आगे पढे
 
गांधीजी अकेले चलने से नहीं डरते थे। आज के भारतीय राजनेताओं में इसका साहस नहीं है, लेकिन क्या वे शांति के लिए औरों को साथ नहीं ले सकते। आगे पढे
 
बेलगाम भाषा टकराव पैदा करती है। साथ ही पीड़ादायक आनंद की सृष्टि भी करती है। सुनने वाला आनंद में रहता है, आगे पढे
 
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