रविवार, 20 अप्रैल, 2014 | 14:42 | IST
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नवंबर 1984 के दूसरे हफ्ते में एक नौजवान सिख को देखा। वह फटे कपड़ों में केलों से भरा ठेला खींचता हुआ बाजार की ओर बढ़ रहा था। उसे रोककर पूछा कि आपके कपड़े क्यों फटे हुए हैं? आगे पढे
 
इस बार असम में पिटी। मैं हिंदी के तात के पास आर्तनाद करते हुए पहुंचा- सर, असम में हिंदी सरेआम पिट रही है, उसे बचाइए। आगे पढे
 
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की 2008 में जब शुरुआत हुई थी, तो मैंने क्रिकेट के इस नए रूप की आलोचना में एक लेख लिखा था। आगे पढे
 
कहते हैं कि कोलंबिया के एक तटीय शहर में पैदा हुए लेखक गाब्रिएल गार्सिया मार्केज ने विश्व साहित्य को जितना प्रभावित किया, उतना बीसवीं शताब्दी के किसी अन्य लेखक ने नहीं। आगे पढे
 
ये चुनावी दिन हैं। हर दोमुंहा सांप पूंछ वाले मुंह को जबड़े में जकड़कर रखे हुए है। पता ही नहीं चलता कि प्रेम हो रहा है या दुश्मनी निकाली जा रही है। आगे पढे
 
 
दोपहर से वह एक काम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पूरा ध्यान नहीं लगा पा रहे। आज सुबह एक काम अधूरा रह गया था। बस उसी पर घूम-फिरकर अटक जाते हैं। आगे पढे
 
एक जमाना था कि पाकिस्तान के शहरी इलाकों में भारतीय मुसलमानों के लिए दर्द उठता था और यही हालत दिल्ली, लखनऊ और हैदराबाद के मुस्लिम मुहल्लों में भी पाकिस्तान के लिए हुआ करती थी। आगे पढे
 
प्रधानमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर रहे नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों एक नया मुद्दा पेश किया- ‘यदि हम जीते, हमारी सरकार बनी, तो काशी को देश की बौद्धिक राजधानी बनाया जाएगा।’ आगे पढे
 
मूवीहॉल में 2 स्टेट्स का प्रमोशन मुंबई के मूवी हॉल में अपनी फिल्म 2 स्टेट्स का प्रमोशन करने पहुंचे अभिनेता अर्जुन कपूर। मुंबई के मूवी हॉल में अपनी फिल्म 2 स्टेट्स का प्रमोशन करने पहुंचे अभिनेता अर्जुन कपूर। अन्य फोटो
इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश के 24 राज्यों में इंटरनेट उपयोगकर्ता मतदान में तीन से चार प्रतिशत तक का बदलाव लाएंगे। आगे पढे
 
चुनाव के विभिन्न चरणों के साथ ही व्यक्तिगत हमले भी बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन बदजुबानी और बेहूदगी नए आयाम छूती जा रही है। आगे पढे
 
अधूरे छूटे हुए कार्य हमें हमेशा कमजोर होने का एहसास कराते हैं। लेकिन आखिर क्यों छूटता है कोई काम अधूरा? कारण दूसरे भी हो सकते हैं, मगर सबसे अहम कारण है- डर। आगे पढे
 
लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि है और इस इच्छा की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति चुनाव के माध्यम से होती है। आगे पढे
 
यूपीए से वोटरों का मोहभंग, भाजपा का भरोसेमंद विकल्प बनना और मोदी का उभार- एक साथ दिख रहे तीन रुझानों में मोदी फैक्टर सबसे बाद में है। आगे पढे
 
इसे हम समकालीन वैचारिक प्रतिफलन या सांस्कृतिक अवमूल्यन के रूप में भी देख सकते हैं। आगे पढे
 
एक दौर था, जब नेताओं का पूंजीपतियों, ठेकेदारों और अपराधियों से गठजोड़ था। अब ऐसा नहीं है। जमाना मल्टी टास्किंग का है, इसलिए नेता ही ठेकेदार, पूंजीपति और अपराधी हो गए हैं। आगे पढे
 
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Image Loading'दो कश्मीरी पंडितों ने की थी गिलानी से मुलाकात'
कश्मीर के दो पंडितों ने 22 मार्च को जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता और ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी से मुलाकात की थी।
 

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