रविवार, 01 मार्च, 2015 | 22:08 | IST
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ब्रेकिंग
जगमोहन डालमिया 10 साल बाद फिर बीसीसीआई के अध्यक्ष बनेबरेली: इंडियन वेटेनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट बरेली में स्वाइन फ्लू की दस्तक, एक मरीज को हुई पुष्टि, तीन और संदिग्ध रोगी आये सामने, आईवीआरई में हड़कंप
भागलपुर से पटना लौटते समय मेरे सहयोगी डॉक्टर तीर विजय सिंह बोले कि बड़हिया में कुछ देर रुकते हैं। वहां का रसगुल्ला मशहूर है और चाय भी बहुत अच्छी मिलती है। अन्य साथियों के चेहरे पर सहमति के भाव देख मैंने हामी भर दी। आगे पढे
 
हे साथी, ऐसा क्यों हो रहा है? इसका समाजशास्त्रीय व अर्थशास्त्रीय कारण क्या है? क्या यह मंदी का असर है या बजट का? हे कॉमरेड! जिस तरह सोवियत संघ के पतन के बाद सोवियत साहित्य बीस रुपये किलो के भाव तौल में मिला करता था, उसी तरह साहित्य अब तौल के भाव मिल रहा है। आगे पढे
 
इस वित्त वर्ष का जो आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया गया है, वह बहुत उम्मीद बंधाता है। एक-आध मोर्चे पर ही खराब आसार दिख रहे हैं- खासकर बाहरी मोर्चे पर। एक तो दुनिया से मंदी का खतरा टला नहीं है। आगे पढे
 
बचपन के एक सबसे रोचक पहलू को हम बाल साहित्य से बेदखल करते जा रहे हैं। जब भी बाल साहित्य की बात होती है, उसमें कहानी, कविताओं को तो शामिल किया जाता है, मगर नाटक शामिल नहीं होते। आगे पढे
 
हम अभी से पीनक में हैं। सीबीआई हमारा क्या कर लेगी? उसे तो होली मनाने तक की फुर्सत नहीं। होली हो, तो भइया केजरीवाल जैसी। पूरी दिल्ली मथुरा-वृंदावन है। आगे पढे
 
 
तनाव के साथ हमारा अजीबोगरीब रिश्ता है। कभी तनाव हम तक चला आता है। और कभी तनाव को हम बुला लाते हैं। तनाव बाहर से ही नहीं, भीतर से भी आता है। आगे पढे
 
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पार्लियामेंट को बताया है कि 20 राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन द्वारा पिछले करीब दो महीने में जो हड़तालें की गईं, उनसे मुल्क की इकोनॉमी को कितना नुकसान पहुंचा है। आगे पढे
 
किसी भी बजट में न सब कुछ अच्छा होता है और न सब कुछ खराब। बजट पेश करते समय मंत्री को संतुलन बनाना पड़ता है। इस हिसाब से कई अर्थों में अपनी सीमाओं के बावजूद, यह रेल बजट अधिक यथार्थवादी है। आगे पढे
 
सुधार की पिच तैयार जेटली ने लोकसभा में अपने बजट भाषण के प्रारंभ में कहा कि मैं एक ऐसे आर्थिक परिवेश में यह आम बजट   पेश कर रहा हूं, जो पिछले समय की तुलना में अधिक सकारात्मक हो है। जेटली ने लोकसभा में अपने बजट भाषण के प्रारंभ में कहा कि मैं एक ऐसे आर्थिक परिवेश में यह आम बजट पेश कर रहा हूं, जो पिछले समय की तुलना में अधिक सकारात्मक हो है। अन्य फोटो
दिल्ली में यमुना नदी को लंदन की टेम्स नदी-सा बनाने की चर्चा कई दशक से चली आ रही है। अब सुनने में आया है कि लखनऊ में शामे अवध की शान गोमती नदी को टेम्स नदी की तरह संवारा जाएगा। आगे पढे
 
कैसा बेदर्द जमाना है! जिन राहुल गांधी ने अकेले दम पर लोकसभा और बाद के विधानसभा चुनावों में पार्टी की छुट्टी करवा दी, आज उन्हीं की छुट्टी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आगे पढे
 
कभी-कभी हद हो जाती है, फिर भी वह हैं कि चुप रहते हैं। बर्दाश्त करना अब उनकी आदत में शुमार हो गया है। यह खतरनाक है, क्योंकि यह ऐसी चीज है, जिससे आप खुद को कम से कमतर की ओर ले जाते हैं। आगे पढे
 
रेल महकमे के कर्मचारियों की अनियमितताओं के कारण साल 2013-14 में पाकिस्तान रेलवे को 20 अरब रुपये का नुकसान हुआ, मगर अफसोस की बात यह है कि इसके लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आगे पढे
 
चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशें राज्यों को व्यापक वित्तीय अधिकार सौंपती हैं, केंद्र के साथ उनका नाता अब अधिक बराबरी वाला हो जाएगा। आगे पढे
 
पर्वतीय क्षेत्र की जरूरतें व समस्याएं मैदानी भूभाग से अलग हैं, इसी आधार पर राष्ट्रीय नीति बने। आगे पढे
 
जिन कुछ लोगों ने कांग्रेस को शुरुआती सालों में बनाया और उसका विस्तार किया, उनके प्रति सम्मान से सिर झुक जाता है। आगे पढे
 
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