शुक्रवार, 03 सितम्बर, 2010 | 13:42 | IST
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जब संघर्ष और राष्ट्रनिर्माण की भट्ठी से निकले पुराने समाजवादियों का कुल मकसद अपनी सीट बचाना और तनख्वाह बढ़वाना रह गया हो जनता को राहुल गांधी का वामपंथ क्यों न अपील करे? आगे पढे
 
आज से ठीक एक वर्ष पहले के. रोसैया ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुरसी संभाली थी। लेकिन दुर्योग से आंध्र के राजनीतिक मुखिया के रूप में इस बजुर्ग नेता के लिए ये 365 दिन उल्लास के बजाय चिंता आगे पढे
 
मेरे लिए यह भी स्त्री विमर्श का एक पहलू है कि आखिर मुन्नी बदनाम हुई क्यूं। वो चिल्ला-चिल्लाकर जिस डार्लिग पर अपनी बदनामी का मादक इल्जाम लगा रही है वो है कौन। आगे पढे
 
वह अपनी टीम को झिड़कने में लगे थे। दूसरी टीम का बार-बार हवाला दे रहे थे। ‘उनको देखो’ अंदाज में उनका प्रवचन चल रहा था। आगे पढे
 
अमेरिका ने इराक में अपना सैनिक अभियान समाप्त कर दिया है। वह अफगानिस्तान से भी अपनी सैनिक वापसी का इरादा जता चुका है। लेकिन, इसका मतलब कतई यह नहीं है कि वह एशिया से हट जाएगा। आगे पढे
 
 
हर युग में कामकाजी महिलाएं और पुरुष जितना काम और परिश्रम करते हैं, उतना ही मनोरंजन करके खुद को तरोताजा बनाए रखते हैं। महारास और रास लीलाओं से बेहतर मनोरंजन भला और क्या हो सकता है? आगे पढे
 
वे अर्थशास्त्र नहीं समझते जो कहते हैं कि अनाज सड़ रहा है, इसे गरीबों को मुफ्त में क्यों नहीं बांट देते। न बांटने के कई कारण हैं। पहला यह कि अनाज सड़ने से अर्थव्यवस्था पर कोई बोझ नहीं पड़ता। आगे पढे
 
वह प्रोजेक्ट जैसे ही उनके पास आया था, वह खुशी से उछल पड़े थे। मानो उसीका अरसे से इंतजार कर रहे हों। शुरू होने से पहले ही उसकी कामयाबी के सपने देखने लगे थे। आगे पढे
 
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इस मौके पर राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों से पुरजोर अपील की है कि वे जनगणना-2011 और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की तैयारी में पूर्ण सहयोग करें।
कामना करनी चाहिए कि कॉमनवेल्थ खेल सफलतापूर्वक सम्पन्न हों, पर इसका श्रेय शोर मचाने वालों को भी मिलना चाहिए। शोर न होता तो ये खेल कैसे होते, पता नहीं। आगे पढे
 
बहुत दिनों से हाशिया ब्लॉग की समीक्षा आप तक लाने की सोच रहा था। बहुत कम लोग हैं जो ब्लॉग की ताकत को समझ सके हैं और उसका भरपूर इस्तेमाल करते हैं। आगे पढे
 
ह्वाइट हाउस के प्रेस मंत्री बिल बर्टन बोले हैं कि राष्ट्रपति एक समर्पित ईसाई हैं। उनके दादा हुसैन ओनयांगी ओबामा मुसलमान थे। सो ह्वाट? आगे पढे
 
हम एक शुरुआत कर देते हैं। उसके बाद मंजिल की ओर बढ़ते रहते हैं, लेकिन अचानक किसी मोड़ पर महसूस होता है कि हम अटकने लगे हैं। ऐसे में हमें सब-कुछ पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है। आगे पढे
 
देश के खनिज संसाधनों की हिफाजत की लड़ाई अब सिर्फ देश के अमूल्य संसाधनों की लूट को रोकने का ही मामला नहीं है, यह हमारे जनतंत्र तथा हमारी राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा की लड़ाई बन गयी है। आगे पढे
 
गत 5-7 वर्षो से भारत में ‘मेडिकल टूरिज्म’ तेजी से फल-फूल रहा था। अचानक एक ब्रिटिश मेडिकल पत्रिका ‘लैनसेट’ ने उसके रास्ते में रोड़े अटकाने का प्रयास किया है। आगे पढे
 
सुबह-सवेरे परिवार की लड़की पढ़ने के लिए उठी। बत्ती जलाई तो भालू को देखकर भागी और बाहर जाकर उसने शोर मचा दिया। लोग लाठियां लेकर आ पहुंचे और उन्होंने भालू को घेर लिया। आगे पढे
 
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