Image Loading Vimarsh - LiveHindustan.com
मंगलवार, 30 अगस्त, 2016 | 13:43 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • जामनगरः पीएम मोदी ने सौनी परियोजना के पहले चरण का शुभारंभ किया, दूर होगा...
  • JOB ALERT: इस राज्य में निकली है सिपाहियों की 1577 रिक्तियां, ऐसे करें अप्लाई
  • लंदन ओलंपिक से योगेश्वर को मिला ब्रॉन्ज अब बदला सिल्वर में, जानिए कैसे
संपादकीय
कश्मीर घाटी में व्याप्त अशांति के थमने के आसार दिख रहे हैं। पत्थर फेंकने की इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ दें, तो कोई व्यापक प्रदर्शन या हिंसा नहीं हुई है।
 
ब्लॉग - शशि शेखर
काश, जिन्ना कुछ संवेदनशील होते
असंभव नहीं कि बांग्लादेश की तरह बलूचिस्तान भी कभी पाकिस्तान के खूनी पंजे से मुक्त हो जाए। ऐसा हुआ, तो यह इस देश का दूसरा बड़ा विखंडन होगा और यह अपने मूल स्वरूप का एक-तिहाई भी नहीं रह बचेगा। साथ
 
आप की राय
वर्षों से शिक्षा की गुणवत्ता और स्वस्थ माहौल के लिए विख्यात जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू अब अपनी साख खोता जा रहा है।
 
न्याय का सामान्य सिद्धांत है कि न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए। लेकिन 18 वर्ष पूर्व के चिंकारा-हिरन शिकार मामले में न्याय होता हुआ कहीं दिखाई नहीं पड़़ा।
 
पता नहीं, कांग्रेस की क्या मजबूरी है कि वह आतंकवाद पर केंद्र सरकार का पुरजोर समर्थन नहीं करती? केंद्र सरकार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी कि गुलाम कश्मीर को भारत में मिलाने के प्रयास कर रही है, मगर कांग्रेस उसका साथ नहीं दे रही।
 
रू-ब-रू
बचपन के सभी संघर्षों के बीच मां ने मेरे मामा से बात की। मेरे मामा के पास काफी जमीन थी, वह सक्षम थे। छोटे मामा किसान थे और बड़े मामा आढ़ती।
 
ढाबे पर काम करते-करते मुझे अक्सर काफी देर हो जाया करती थी। जिस कारण वहां मुझे नींद आने लगती थी। पर वहां मुझे ‘टिप’ भी मिलती थी। मेरे ख्याल से जो लोग खाना खाने आते थे, उन्हें लगता होगा कि देखने में मैं अच्छे घर का लगता हूं, तो वे जाते वक्त हाथ पर दो-चार पैसे रख देते थे।
 
पिताजी रेलवे स्टोर में काम करते थे। स्टोर से सीमेंट की 15-20 बोरियां चोरी हो गईं। पुलिस ने इस चोरी के आरोप में मेरे पिताजी को गिरफ्तार कर लिया। रेलवे वालों ने हमसे घर खाली करा लिया।
 
प्रमोशनल इवेंट में सिद्धार्थ-कैटरीना अहमदाबाद में अपनी आने वाली फिल्म बार बार देखो के प्रमोशन के मौके पर फैन्स के साथ सेल्फी लेते सिद्धार्थ मल्होत्रा और कैटरीना   कैफ। अहमदाबाद में अपनी आने वाली फिल्म बार बार देखो के प्रमोशन के मौके पर फैन्स के साथ सेल्फी लेते सिद्धार्थ मल्होत्रा और कैटरीना कैफ। अन्य फोटो
कॉलम
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का यह बयान कि कश्मीर की लड़ाई को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने के लिए वह अपने 22 सांसदों को बतौर दूत भेज रहे हैं, दरअसल इस्लामाबाद की उसी 'दिशाहीन' रणनीति का परिचय देता है, जो वह भारत के संदर्भ मेें हमेशा से अपनाता रहा है।
 
पिछले दिनों आमिर खान की फिल्म दंगल का पोस्टर जारी हुआ, जिसमें वह चार बेटियों के साथ बैठे हुए हैं और हरियाणवी में लिखा है- म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के? दंगल से जुड़ी एक बात विशेष रूप से जिक्र किए जाने योग्य है कि यह फिल्म बेटियों के पक्ष में है।
 
अकेले होने को अक्सर अच्छा नहीं माना जाता। ज्यादातर शोध ऐसी स्थिति को मनोरोग से जोड़ते हैं और इनके बीच वे शोध रिपोर्ट्स कहीं खो जाती हैं, जो इसे लेकर सकारात्मक हैं।
 
सन 1957 में बीआर चोपड़ा की फिल्म नया दौर आई थी, जो उस वक्त मदर इंडिया के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म साबित हुई।
 
जीने की राह
डॉक्टर बनना चाहती थी, पापा ने रोक दिया
कोलकाता में जन्मी अरुंधति का बचपन भिलाई में बीता। पिता भिलाई स्टील प्लांट में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और मां होम्योपैथी डॉक्टर।
 
लड़कियां क्यों नहीं बन सकतीं पहलवान 
जब मेरी ट्रेनिंग शुरू हुई, तो इलाके में कोई महिला पहलवान नहीं थी। कई लोगों ने सवाल उठाए कि लड़की पहलवान बनकर क्या करेगी? पर मैं ठहरी जिद्दी लड़की। ठान लिया, पहलवान ही बनूंगी। इस सफर में मां ने मेरा बहुत साथ दिया। उनकी बदौलत ही यह सपना पूरा कर पाई। 
 
उनकी हार में भी है जीत
मेरे चेहरे को लकवा मार गया। डॉक्टर ने कहा कि निशानेबाजी बंद करनी पड़ेगी। मैं सहम गया। अब क्या होगा? फिर तय किया कि खुद को हारने नहीं दूंगा। अगले साल ही मेडल जीतकर साबित किया कि हौसला साथ हो, तो रास्ते बन ही जाते हैं।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
देखिये जरूर