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शनिवार, 21 जनवरी, 2017 | 11:49 | IST
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संपादकीय
बुल फाइट यानी सांड़ से इंसानी लड़ाकों की लड़ाई का खेल स्पेन की राष्ट्रीय पहचान माना जाता है। स्पेन इसे दुनिया भर में अपनी पहचान के रूप में ही प्रचारित करता है। इसका इस्तेमाल दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भी किया जाता है।
 
ब्लॉग - शशि शेखर
अपनी-अपनी अग्नि परीक्षा
हिंदी पट्टी की मशहूर कहावत है- ‘जब पिता के जूते में बेटे के पांव समाने लगें, तो उसे अपने पैर वापस खींच लेने चाहिए।’ क्या समाजवादी पार्टी के बुजुर्ग नेता इसको बिसरा बैठे हैं?
 
आप की राय
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी देश के अन्य सभी नेताओं से हटकर अपनी बात रखते हैं! नोटबंदी के समय वह चंद रुपये निकालने बैंक की लाइन में खड़े हुए, जबकि वह एटीएम तक महंगी कार में गए थे।
 
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना फटा कुरता पूरे देश को दिखाया और बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के कपड़े नहीं फटते। उनके कपड़े कैसे फटेंगे? वह तो अभी सत्ता में हैं।
 
उत्तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। सत्ता की चाह में राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए जाति, धर्म और क्षेत्रवाद का सहारा लेने के प्रयास कर रहे हैं।
 
रू-ब-रू
साल 1994 में मैं अमेरिका के एक ‘टुअर’ पर गई थी। यह मेरी आवाज सुनो से पहले की बात है। तब मेरे पास अपना कोई गाना भी नहीं था। वह बच्चन साहब का ‘टुअर’ था। दरअसल, अमिताभ जी कल्याणजी-आनंदजी भाई के संपर्क में थे।
 
मेरी आवाज सुनो  जीतने के बाद भी जिंदगी बिल्कुल ‘नॉर्मल’ ही थी। उसके बाद मुझे स्कूल में भी कोई ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ नहीं मिला। जो टीचर मुझे बहुत सपोर्ट करते थे, प्यार करते थे, उन्होंने जरूर बहुत हौसला-अफजाई की, लेकिन स्कूल में कुछ और नहीं हुआ।
 
नौ अक्तूबर 1996, यह तारीख मेरी जिंदगी में बहुत अहम है। इसी दिन मैं टीवी शो ‘मेरी आवाज सुनो’ के फाइनल में हिस्सा लेने गई थी। हालांकि मुझे उस ‘कॉम्पिटीशन’ का हिस्सा नहीं बनना था।
 
कॉलम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली जनवरी में नेताजी सुभाषचंद्र बोस जन्मशती पर नेताजी से जुड़ी फाइलों की गोपनीयता से परदा उठाने की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री ने गाजे-बाजे के साथ यह काम किया।
 
भारतीय टीम दसवें क्रिकेट विश्व कप में 24 मार्च, 2011 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल खेल रही थी। एक बड़े वर्ग का मानना था कि विश्व कप में भारत का सफर इसी मैच पर थम जाएगा।
 
इतना बड़ा झटका उन्हें जिंदगी में लगा था। वह सन्न रह गए थे। सुबह कुछ लोग दिलासा देने आए थे। लेकिन जितनी कोई दिलासा देता, उतना ही वह उखड़ जाते।
 
भारतीय समाज में औरतों के खिलाफ जारी, बल्कि बढ़ती हुई हिंसा को लेकर चिंतित और भयभीत होने की कई सारी वजहें हैं। निस्संदेह, यह कोई नया लक्षण नहीं है, क्योंकि ऐसी हिंसा भारतीय समाज में ढांचागत और स्थानीय, दोनों रूपों में हमेशा से मौजूद रही है।
 
जीने की राह
मैं समझती हूं गरीबी का दर्द
विओला का जन्म अमेरिका के साउथ कैरोलिना के एक गांव में हुआ। वहां उनके दादा-दादी का पैतृक घर था। परिवार के हालात ऐसे नहीं थे कि मां को अस्पताल ले जाया जाता। इसलिए नर्स ने घर पर ही उनका जन्म कराया।
 
जानते नहीं, पर बहुत अच्छे हो आप   
कई ऐसे उदाहरण हैं, जब हम अपने लिए जरूरत से ज्यादा कठोर हो जाते हैं। दूसरों की अच्छाइयां इस कदर हावी हो जाती हैं कि खुद में क्या अच्छा है, हम वह देख ही नहीं पाते।
 
आखिर क्यों डर जाती हैं महिलाएं  
हिसार के एक जाट परिवार में जन्मी कृष्णा नौ साल की थीं, जब उनकी मां चल बसीं। इसके बाद दादी और पापा ने उनकी देखरेख की। गांव में बेटियों को पढ़ाने-लिखाने का खास रिवाज नहीं था।
 
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क्रिकेट स्कोरबोर्ड
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