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गुरुवार, 28 जुलाई, 2016 | 15:55 | IST
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संपादकीय
भारत के रेलवे स्टेशन बहुत गंदे होते हैं, यह बताना जरूरी नहीं है, लेकिन यह अच्छी कवायद है कि रेलवे स्टेशनों की सफाई का सर्वे किया जाए और सफाई के आधार पर उन्हें अंक दिए जाएं।
 
ब्लॉग - शशि शेखर
विजय पर्व पर वीरों की चिंता
कारगिल युद्ध के 17 साल बीतने के बावजूद जब ऐसी खबरें उड़ती हैं कि सेना के पास अब भी जरूरी संसाधनों का अभाव है, तो दुख होना स्वाभाविक है।
 
आप की राय
यह विडंबना है कि देश में लगातार इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार के मामले सामने आने के बावजूद महिला-उत्पीड़न कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बन पा रहा है। हालांकि, महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए कड़े कानून हैं।
 
‘आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंजर क्यूं है, जख्म हर सर पे, हर इक हाथ में पत्थर क्यूं है’... दलित किशोरों को पीटने की गुजरात की घटना ने बताया कि किस तरह लोकतंत्र पर भीड़तंत्र हावी होता जा रहा है।
 
भारतीय राजनीति में वास्तविक मुद्दों का अकाल ही है कि स्वयं को नेता और उनके समर्थक कहने वाले लोगों की सोच का स्तर इतना गिर चुका है कि उन्होंने भाषायी शालीनता को ताक पर रख दिया है।
 
रू-ब-रू
हम दोनों भाइयों में यह करार था कि वह जो कुछ फिल्म इंस्टीट्यूट में सीखेगा, मुझे सिखाएगा और मैं फिल्मों में बतौर असिस्टेंट जो सीखूंगा, उसे बताऊंगा।
 
मुझे विधु विनोद चोपड़ा से कुछ सवाल करने का मौका मिल गया। फिल्मों को लेकर मेरी जानकारी विधु को पसंद आ गई। उन्होंने मुझे कहा- मुंबई चलो।
 
उन दिनों दिल्ली में मैं थिएटर में भी काफी ‘एक्टिव’ था। आए दिन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के चक्कर काटता रहता, लेकिन जब एनएसडी में एडमिशन लेने की कोशिश के लिए वहां गया, तो मुझे निराशा हाथ लगी।
 
हैप्पी बर्थडे हुमा हुमा ने अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर कई बड़े अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए हैं। हुमा ने अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर कई बड़े अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए हैं। अन्य फोटो
कॉलम
अभी डोपिंग को लेकर दो मामले सुर्खियों में हैं। एक पहलवान नरसिंह यादव का, तो दूसरा शॉटपुट खिलाड़ी इंदरजीत सिंह का। इंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके यूरीन सैंपल के साथ छेड़छाड़ की गई है।
 
जब हम बच्चे थे, तो पत्रिकाओं में चमत्कारी अंगूठी के विज्ञापन छपते थे, जिसे धारण करने से तुरंत सारे काम बन जाएंगे। नौकरी, धंधा, वशीकरण, लव मैरिज, पति का प्यार, सौत से मुक्ति, संतान, सब कुछ सिर्फ 9.99 रुपये वाली चमत्कारी अंगूठी से हो सकता था।
 
हरेक देश में प्रतिभाओं के विकास और उसकी आर्थिक तरक्की की क्षमताओं के आकलन के लिए वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) ने एक मानक तंत्र ‘ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स’ (एचसीआर्ई) अपनाया है।
 
सावन की ही तरह हर दिन जिंदगी में नया रूप, नया रंग चढ़ता है। नए संकल्प, नई आशा के साथ अपने जीवन को नई चेतना प्रदान करते हैं।
 
जीने की राह
कहीं यह सपना तो नहीं
हमारे कस्बे में टेनिस एकेडमी नहीं थी। रोज 70 किलोमीटर का सफर तय करके सोलापुर जाना पड़ता था। आने-जाने में करीब चार-पांच घंटे लगते थे। पापा ने भी मेरे लिए खूब मेहनत की।
 
साइकिल पर दूध बेचा करती थी
घर के हालात अच्छे नहीं थे। पापा की मदद के लिए घर-घर जाकर दूध बेचा। स्कूल ने मेरी बहुत मदद की। खेल टीचर ने मुझे पहली बार हॉकी स्टिक खरीदकर दी।
 
रोजाना दो रुपये मजदूरी पर किया काम
बारह साल की उम्र में शादी हो गई। ससुराल वालों ने खूब सताया। गांव वालों ने ताने मारे, इसलिए जान देने की कोशिश की। फिर चाचा के घर मुंबई आ गई।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
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