शनिवार, 25 अक्टूबर, 2014 | 18:12 | IST
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ब्रेकिंग
रक्षा खरीद परिषद ने करीब 80,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी।नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हादसा, ट्रेन के नीचे आने से एक व्यक्ति की मौतकेंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह महाराष्ट्र में सरकार के गठन के संदर्भ में सोमवार को राज्य का दौरा कर सकते हैं: सूत्र
संपादकीय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवाली पर कश्मीर यात्रा मानवीय नजरिये से और राजनीतिक निहितार्थो के नजरिये से भी महत्वपूर्ण थी।
 
विदेशी अखबारों से
बांग्लादेश में राजमार्गों और शहरों की आम सड़कों, दोनों पर मुसाफिरों की जिंदगी खतरे में बनी रहती है और उनकी हिफाजत की राह में ढेर सारी रुकावटें व समस्याएं खड़ी हैं।
 
आप की राय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवाली जम्मू-कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों और कश्मीर-सियाचिन सीमा पर तैनात सेना के जवानों के साथ मनाई। सबके साथ मिल-जुलकर रहना यह मोदीजी की खासियत है।
 
हमारे मन का अंधियारा सच्चे, पक्के और अच्छे इरादों से ही दूर होगा। इन इरादों को अपने मन में जगह देने के लिए दीपावली से बेहतर त्योहार और क्या हो सकता है?
 
रू-ब-रू
हॉट सीट पर पहुंचने से पहले ‘फास्टेस्ट फिंगर राउंड’ जीता, तब अमिताभ बच्चन के समक्ष प्रस्तुत हुआ, तो नर्वस था कि पहले आनन-फानन में कुछ करो, फिर अपने महानायक से मिलो।
 
तमाम तरह के प्रोग्राम में शरीक और मसरूफ होने के बावजूद हमारी मंजिल बेहद अहम है। वह मंजिल है- सभी बच्चों को तालीम हासिल कराना।
 
मीडिया ने कलम को ही झाडू बना दिया है उन्होंने यह भी कहा कि कभी वह भी पार्टी मुख्यालयों में आयोजित होने वाले संवाददाता सम्मेलन में मीडियाकर्मियों के लिए बैठने की व्यवस्था करते थे और उनसे बिना किसी रोक-टोक के मुखातिब होते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कभी वह भी पार्टी मुख्यालयों में आयोजित होने वाले संवाददाता सम्मेलन में मीडियाकर्मियों के लिए बैठने की व्यवस्था करते थे और उनसे बिना किसी रोक-टोक के मुखातिब होते थे। अन्य फोटो
कॉलम
भाई दूज को त्योहार के रूप में मनाया जाता है, यह हम सभी जानते हैं। इसे ही क्यों, ज्यादातर त्योहारों को मनाने वाली स्त्रियां ही होती हैं।
 
पाप का प्रायश्चित तो नया पाप करने से ही होता है। हर कांटा कांटे से नहीं निकल पाता। अपने बाप के मंत्री होते हुए जो बेटा चुनाव नहीं जीत पाता, समझो कि कहीं उसके डीएनए में ही खोट है।
 
जीने की राह
जोशुआ वांग: अठारह साल की उम्र में गांधीगिरी
बस कुछ दिन पहले ही मैंने अपना 18वां जन्मदिन मनाया है। इन दिनों मैं हांगकांग ओपेन यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई कर रहा हूं। मेरा जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ।
 
मुंबई का भाई बनना चाहता था
उन दिनों मेरा पूरा दिन मौज-मस्ती में बीतता था। तब मैं केवल 14 साल का था। हम नागपुर की एक झोपड़पट्टी में रहते थे। मेरे माता-पिता मेहनत मजदूरी करके घर चलाते थे और मैं मोहल्ले के बच्चों के संग इधर-उधर घूमता-फिरता रहता था।
 
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