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शनिवार, 03 दिसम्बर, 2016 | 22:58 | IST
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संपादकीय
तमाम नए रास्ते अब यहीं से निकलने लगे हैं। एक साथ पूरे देश को आधुनिकता की ओर ले जाने में आधार कार्ड या आधार नंबर अचानक इतने महत्वपूर्ण हो जाएंगे, यह हममें से बहुत से लोगों ने कुछ समय पहले तक सोचा भी न था।
 
ब्लॉग - शशि शेखर
ये आफत आसमान से नहीं उतरी
मौजूदा वक्त में बहुत कुछ ऐसा है, जिस पर रोक लगाई जानी चाहिए। आतंकवाद, गृह-युद्ध और दुर्घटनाओं से कहीं ज्यादा लोग हर साल प्रदूषण से मारे जाते हैं। हम आत्मघाती चुप्पी के शिकार क्यों हैं? क्या हमें दुनिया के गैस चैंबर में तब्दील हो जाने का इंतजार है?
 
आप की राय
पिछले कुछ दिनों से यह स्पष्ट है कि विपक्ष संसद में हंगामा की स्थिति बनाए रखना चाहता है। उसका देश की जनता की तकलीफों से कोई मतलब नहीं है।
 
सरकार ने आयकर संशोधन विधेयक को लोकसभा से बिना चर्चा किए पास करा लिया, और मनी बिल होने के कारण राज्यसभा में कोई समस्या नहीं होगी। मगर इस प्रावधान का औचित्य समझ में नहीं आया कि खुद काला धन की घोषणा करने के बाद 50 प्रतिशत सरकार का और 50 प्रतिशत आपका क्यों?
 
जम्मू के नगरोटा स्थित सेना मुख्यालय के समीप हमला बताता है कि आतंकियों का सेना पर आक्रमण करने का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है।
 
रू-ब-रू
बचपन में हमने संघर्ष भी देखा। हमारे पिताजी 1957 में दिल्ली आए। वह यहां पर एक संस्था में संगीत सिखाते थे। उस संस्था का नाम था, ‘कल्चरल ऑर्गनाइजेशन ऑफ दिल्ली’। फिर वह वक्त भी आया, जब उस संस्था ने हमसे कहा कि वह हमें भी नौकरी देगी।
 
शुरू-शुरू में मुझे तबले से बहुत लगाव हो गया था। मैं काफी तबला बजाता था। पिताजी घबरा गए कि कहीं ऐसा न हो कि मैं सरोद छोड़ दूं। उनकी घबराहट का नतीजा यह हुआ कि जल्दी ही हमारे घर से तबला गायब हो गया। इसके बाद मेरा ध्यान वापस सरोद की तरफ लौटा।
 
भजन की लोकप्रियता में क्या कमाल का ‘वेरिएशन’ है। मैं लंदन के रॉयल एल्बर्ट हॉल में भजन गाता हूं, ऑस्ट्रेलिया में भजन गाता हूं और दूसरी तरफ खेतों में भी भजन गाता हूं।
 
कॉलम
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देश की आर्थिक तस्वीर एक झटके में, खासकर रोजाना के लेन-देन के मामले में पूरी तरह बदल गई है। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि मोची से लेकर कंपनी के सीईओ तक, सभी भारतीयों का जीवन लेन-देन के मामले में बदल गया है।
 
कभी उनके पूर्वज इसी जल-धारा के किनारे-किनारे भटकते जीवन की आस में यहां बस गए थे। उन्होंने यहां खेत बनाए, मवेशी पाले, गांव बसाया, उसके साथ गीत-लोक- समाज आया।
 
सब रास्ते बंद लग रहे थे उन्हें। खुद को इतना हताश कभी महसूस नहीं किया। मानो सब कुछ ठहर गया हो।  ‘कभी हमारे बंद कमरे में अचानक कोई खिड़की खुलने लगती है।
 
क्या वाकई पाक सेना प्रमुख बाजवा कुछ बदल सकेंगे?
पाकिस्तान के नए सेनाध्यक्ष के रूप में जनरल कमर जावेद बाजवा की नियुक्ति के बाद कयासों का दौर जारी है। कयासबाजी यह कि इस नियुक्ति से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर कितना असर पडे़गा?
 
जीने की राह
भारत से नाता मेरे लिए गर्व की बात 
निक्की के माता-पिता पंजाब के रहने वाले थे। उनका परिवार अमृतसर शहर में रहता था। पिता अजित सिंह रंधावा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। पीएचडी करने के लिए उन्होंने कई विदेशी यूनिवर्सिटी में आवेदन किए।
 
कई हसरतें पूरी नहीं हो पातीं
एक्शन फिल्मों के महानायक जैकी चान ने बतौर यूनीसेफ एंबेसडर दुनिया भर में कई सारे स्कूल बनवाए। वह कहते हैं कि पढ़ाई बहुत जरूरी है। काश, मैं डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बन पाता। मैं ऐसा कुछ नहीं बन पाया। इस बात का मुझे मलाल है।
 
न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा 
कमला की मां श्यामला गोपालन तमिलनाडु के चेन्नई शहर की रहने वाली थीं। डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए अमेरिका गईं। यह बात साल 1960 की है। बर्कले यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान जमैका मूल के अमेरिकी छात्र डोनाल्ड हैरिस से उनकी दोस्ती हो गई।
 
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