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बुधवार, 29 जून, 2016 | 01:59 | IST
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  • पढि़ए शशि शेखर का ब्लॉग: आने वाले वक्त में अमरत्व
संपादकीय
यह अच्छी खबर है कि आयकर विभाग ने विदेश में जमा लगभग 13,000 करोड़ रुपये के काले धन का पता लगाया है और यह काला धन विदेशी बैंकों में रखने वालों पर कार्रवाई शुरू की है।
 
ब्लॉग - शशि शेखर
प्रथम वचन: आने वाले वक्त में अमरत्व
कांपते-लड़खड़ाते बुजुर्ग और दाह संस्कार के लिए ले जाए जा रहे शव को देखकर कपिलवस्तु के राजकुमार के मन में सवाल कौंधे थे-अगर यही नियति है, तो इस सांसारिकता का क्या अर्थ? हम क्यों बेवजह इतनी मोह-माया पालते हैं? क्यों खुद मृग-मरीचिकाएं बनाते हैं और फिर उनमें फंसे रह जाते हैं?
 
आप की राय
भारत का एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) में प्रवेश को लेकर चीन के विरोध से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को जारी रखना चाहिए?
 
यूरोपीय संघ से अलग होने का ब्रिटेन का फैसला कितना कारगर होगा, इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में है। मगर यह तय है कि ब्रिटेन के लिए आने वाले दिन आसान नहीं रहने वाले। शुुरुआत पाउंड के गिरने के साथ हो गई है।
 
अपनी आने वाली फिल्म ‘सुल्तान’ की शूटिंग के बाद दिए गए इंटरव्यू में असंवेदनशील तरीके से बलात्कार पर टिप्पणी करके सलमान खान ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
 
रू-ब-रू
पिछले करीब दो साल से मेरी एक और पहचान है। मैं आम चुनाव में नरेंद्र मोदी का बनारस निर्वाचन क्षेत्र में प्रस्तावक भी था। उसका किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है।
 
मैंने अपनी गायकी में एक खास अंदाज विकसित किया। मैं सिर्फ गाता नहीं हूं, बल्कि लोगों को समझाता भी हूं। उन्हें बताता हूं कि स्वर, मींड, मुर्की, खटका इन शब्दों के क्या मायने होते हैं?
 
मुझे याद है कि बनारस में एक चैती सम्मेलन होता था। उसको गुलाबाड़ी भी कहते थे। एक साथ दस-दस कलाकार बैठते थे। संगीत के माध्यम से ही लोग अपनी बात कहते थे।
 
सुल्तान फिल्म सुल्तान 6 जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म सुल्तान 6 जुलाई को रिलीज होगी। अन्य फोटो
कॉलम
हिंदी के प्रतिष्ठित कवि शमशेर बहादुर सिंह ने 1945 में एक कविता लिखी थी- वाम, वाम, वाम दिशा/ समय साम्यवादी। इस कविता को बाद में अज्ञेय ने ‘दूसरा सप्तक’ में भी शामिल किया था।
 
उच्च शिक्षण संस्थानों में लड़कों के दाखिले क्या इसलिए कम हो रहे हैं, क्योंकि वे ऑनलाइन वीडियो गेम खेलने में व्यस्त हैं? ‘हायर एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ की रिपोर्ट को आधार बनाकर कहा तो यही जा रहा है।
 
कलम के मारे सिर्फ किसान नहीं होते, अब पता चला कि बड़े-बडे़ नेता भी होते हैं। कलम के मारे मुव्वकिल ही नहीं होते, वकील भी होते हैं। दफ्तर चाहे कितने ही पेपरलेस हो गए हों, पर कई लोगों की किस्मत के फैसले अब भी कागज-कलम से ही होते हैं।
 
एक बूढ़े अनपढ़ अरब को इबादत करते देख उसके रईस मालिक ने पूछा, ‘तुम लिखना-पढ़ना तो जानते नहीं, खुदा को कैसे जानते हो?’ बूढ़े शख्स ने जवाब दिया, ‘मैं ऊपर वाले मालिक की लिखाई पढ़ लेता हूं’।
 
जीने की राह
कभी सड़क किनारे अचार बेचती थी
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पैदा हुईं कृष्णा को कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। पिता गरीब किसान थे। पांच साल की हुईं, तो पिता के संग खेतों में मजदूरी करने लगीं। फिर मां घर के कामकाज सिखाने लगीं।
 
जज्बे के आगे पहाड़ भी पड़े बौने
सुजाता के पिता एयरफोर्स में थे। लिहाजा उन्हें देश के अलग-अगल हिस्सों में रहने का मौका मिला। शुरू से रोमांच की शौकीन रहीं सुजाता को पहाड़ों की सैर बहुत पसंद थी। उनका बचपन काफी खुशनुमा रहा।
 
क्रिकेट और फुटबॉल दोनों की टीम में
डायना बेग गिलगित इलाके की रहने वाली हैं। कभी यह इलाका जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हुआ करता था। अब पाकिस्तान में है। उनका बचपन हुंजा घाटी में बीता। यह घाटी पाकिस्तान के उत्तरी गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में स्थित है।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
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