शनिवार, 05 सितम्बर, 2015 | 10:58 | IST
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संपादकीय
तुर्की के एक समुद्र तट पर तीन साल के सीरियाई बच्चे के शव की तस्वीर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है।
 
विदेशी अखबारों से
जब राजा हिरोहितो ने जापानियों को कहा कि समय आ चुका है कि 'असहनीय गम को बर्दाश्त' करें और यह स्वीकारें कि जापान युद्ध हार चुका है, तो उसके अगले ही दिन 15 अगस्त,1945 को आहत, मगर प्रफुल्लित चीनी नेता च्यांग काई-शेक ने भी अपने राष्ट्र को संबोधित किया।
 
आप की राय
बीते दिनों प्रकाशित हिमांशु का लेख 'नाराज क्यों हैं गुजरात के पटेल' नए जनांदोलन पर सटीक विवेचना प्रस्तुत करता है, क्योंकि गुजरात में जब कृषि की बात आती है, तो सबसे पहले पटेलों का नाम आता है।
 
लगभग पूरी दिल्ली में आज सड़कों पर पसरती दुकानें और गाडि़यां बहुत बड़े जाम और हादसों का सबब बनी हुई हैं। इनसे सबका जीना हराम हो गया है।
 
रू-ब-रू
वे अजीब-से दिन थे। 1959 की बात है। मैं यथार्थ के धरातल पर कहानियां लिख रही थी और सपनों की दुनिया में जी रही थी। राजेंद्र की मित्रता का परिणाम यह हुआ कि मेरे लेखकीय उत्साह-उमंग में रोमानी रंग भी भरने लगे। परिवर्तन एकतरफा नहीं था।
 
आज जब कभी सोचती हूं, तो विश्वास ही नहीं होता कि उस समय लिखने को लेकर मेरे मन में बहुत जोश, बेचैनी या बेताबी जैसा कुछ था। जोश का सिलसिला तो शुरू हुआ था मेरी पहली ही कहानी के छपने, भैरव जी के प्रोत्साहन और पाठकों की प्रतिक्रिया से।
 
जन्माष्टमी की धूम ब्रज में पिछले कुछ वर्षों की भांति इस वर्ष भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 2 दिन   यानी 5 और 6 सितंबर को मनाया जाएगा और इसके लिए शहर में व्यापक बंदोबस्त   किए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालु सुचारू रूप से भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मना सकें।   ब्रज में पिछले कुछ वर्षों की भांति इस वर्ष भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 2 दिन यानी 5 और 6 सितंबर को मनाया जाएगा और इसके लिए शहर में व्यापक बंदोबस्त किए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालु सुचारू रूप से भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मना सकें। अन्य फोटो
कॉलम
जब भगवान श्रीकृष्ण समाधि में बैठे, तब उन्होंने भगवद् गीता सुनाई थी। युद्ध के उपरांत अर्जुन ने उनसे कहा, 'आपने जो मुझे सुंदर उपदेश युद्ध के दौरान प्रदान किया, मैं उसे भूल गया, क्योंकि युद्ध भूमि में बहुत भीड़ थी और जंजाल था और मैं आपको ठीक से सुन नहीं पाया।
 
मुझे याद नहीं कि जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस एक साथ कब पड़े थे। इस साल तो एक छुट्टी मारी गई। फर्क क्या पड़ता है? दिन में शिक्षक दिवस। रात में जन्माष्टमी।
 
जीने की राह
डांस के लिए पांव नहीं, जज्बा चाहिए
शुभरीत पंजाब के संगरूर इलाके की रहने वाली हैं। परिवार में मां और छोटी बहन हैं। पिता की मौत के बाद खेती-किसानी की जिम्मेदारी मां चरणजीत पर आ गई।
 
जो मेरे साथ हुआ, किसी के संग न हो
केरल के एक बेहद पिछडे़ गांव में रहने वाली रानी का परिवार बेहद गरीब था। पिता की बीमारी के बाद हालात ऐसे बिगड़े कि परिवार को कई दिनों तक भूखे पेट सोना पड़ा। मजबूर मां ने पड़ोस में रहने वाली एक संपन्न महिला से मदद की गुहार लगाई।
 
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