class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चैंपियन

जिस मैच में उसे टूर्नामेंट की पसंदीदा टीम के खिलाफ काफी कमजोर आंका गया था और जिस टूर्नामेंट में वह बहैसियत सबसे निचले दरजे की टीम के तौर पर शामिल हुई थी व अपनी रैंकिंग को बचाए रखने की उसे जद्दोजहद करनी थी, उस मैच, टूर्नामेंट में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम ने अद्भुत खेल दिखाया है। रविवार को उसने चिर-प्रतिद्वंद्वी टीम इंडिया को हराकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की चैंपियन्स ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस राह में रुकावटें तमाम थीं और मुश्किलें  भी कई, मगर खिताब चूमने की उम्मीदें भी थीं। वाकई पाकिस्तान की टीम के बारे में ऐसा कोई सोच नहीं सकता था। यह पहली मर्तबा है, जब हमने यह खिताब जीता है और यह पहला मौका है, जब हमारी टीम इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थी। यह जीत न सिर्फ काफी कोशिशों के बाद हासिल की गई है, बल्कि यह तकदीर का बदलना भी है। शुरुआती लीग मैच में भारत के हाथों करारी शिकस्त खाने और देश-दुनिया के तमाम कमेंटेटरों द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद पाकिस्तान की टीम ने जबर्दस्त वापसी की और मैच-दर-मैच उसने खुद को निखारा। फाइनल में तो उसने भारत को उससे भी बड़े अंतर से हराया, जितने से वह उससे हारी थी। पाकिस्तान ने हर क्षेत्र में अच्छा खेल दिखाया;  चाहे वह बैटिंग हो, बॉलिंग, फिल्डिंग या कप्तानी। यह सरफराज अहमद की सदारत में बनी एक युवा टीम और कोच मिकी आर्थर के लिए बड़ी कामयाबी है। इसे हम पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक नए युग की शुरुआत भी कहेंगे, जो सीमित ओवरों के खेल में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है, तो टेस्ट में मिसबाह उल हक और युनूस खान के क्रिकेट छोड़ने के बाद जद्दोजहद करने वाली है। यह जीत पाकिस्तानी क्रिकेट के भविष्य का शुभ संकेत है कि एक प्रतिभाशाली टीम एकजुट होकर उपलब्धि हासिल कर सकती है। टीम पाकिस्तान ने दिखाया है कि घरेलू क्रिकेट का माहौल न होने के बाद भी वह यादगार प्रदर्शन कर सकती है, बशर्ते वह चाह ले तो। हमारा मानना है कि यह पाकिस्तान के लिए दुर्लभ पल हैं, और हम सबको एक मुल्क के तौर पर एकजुट होकर इसका जश्न मनाना चाहिए।

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