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  • sudhish pachauri

    तीसरी कसम पहले खा चुका हूं, अब चौथी खाने जा रहा हूं कि चाहे कुछ हो जाए, अपने लेखन में आगे से किसी कवि का, कथाकार का, आलोचक का नाम तक न लूंगा। नाम, गांव और शहर की बात छोड़िए, मैं तो उस दिशा तक का जिक्र न...

    16 जुलाई, 2017 12:29 AM Poet Literary Hindi Literature
  • sudhish pachauri

    न जाने कितने दिनों से मेरा मन कर रहा है कि अब जंतर मंतर पर बैठ ही जाऊं। जंतर मंतर की महिमा ही कुछ ऐसी है। जो गया, वह अमर हुआ। उसी का नाम हुआ। उसी का काम हुआ। जो भी उस पवित्र-पुण्य फुटपाथ पर बैठ गया...

    8 जुलाई, 2017 10:20 PM Jantar Mantar Literature Hindi Literature
  • sudhish pachauri

    अच्छे आलोचक को नंबर वन का झूठा होना चाहिए। अच्छे आलोचक के पास कम से कम दो स्मार्ट फोन होने ही चाहिए। जो चेलों द्वारा जन्मदिन पर दिए होने चाहिए। चेलों को मंच पर ही दो चार बार फोन करने चाहिए ताकि...

    1 जुलाई, 2017 7:05 PM Critic Literature Hindi Literature
  • sudhish pachauri

    ये नोबेल के लेवल को क्या हुआ? लगता है कि वह भी हिंदी लेवल का हो गया है। जिस नामी गीत गायक बॉब डिलन को पिछले दिनों नोबेल सम्मान दिया गया, जिसे ‘सम्मान’ के जबाव में ‘धन्यवाद भाषण’ देने के लिए...

    24 जून, 2017 11:13 PM Hindi Literature Literary Theft Of Articles
  • sudhish pachauri

    आलोचना के लोचन पूरी तरह से खुले भी न थे कि उसका अंत हो रहा है। एक ही तो धंधा था, जिसे साधा था, लेकिन अब उसे भी जमाने की नजर लग गई। करूं, तो कोई करने नहीं देता; लिखूं, तो कंप्यूटर खुद मना कर देता है कि...

    18 जून, 2017 12:00 AM Critic Sudhir Pachauri Criticism
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    लेखक हो, तो अंग्रेजी वाला। अंग्रेजी का हो, तो थर्ड वर्ल्ड वाला। थर्ड वर्ल्ड वाले में भी इंडिया वाला। इंडिया वाला हो, तो एलीट-एलीट वाला। एलीट हो, तो पांच सितारे वाला। पांच सितारे वाला हो, तो...

    10 जून, 2017 11:57 PM Hindi Hindi Literature English
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    एक प्रश्न रह-रहकर कुलबुलाता रहता है। अकादेमी के गलियारों में सुनाई तो देता है, मगर दिखाई नहीं देता। जब-जब ऐसा होता है, मेरा मन ‘उन्मनी अवस्था’ में पहंुच जाता है। इस कदर ‘उन्मन’ होता है कि...

    3 जून, 2017 11:58 PM Hindi Literature Hindi Articles Literature
  • ‘काव्य की आत्मा’ की तलाश में संस्कृत के पंडितों ने हजारों साल तक सिर खपाया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। किसी ने कहा कि काव्य की आत्मा ‘रस’ है। किसी ने कहा ‘अलंकार’ है। किसी ने कहा...

    28 मई, 2017 12:23 AM Poetry Literature Poet
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    शताब्दीबाजों से विनती कर रहा हूं कि अब शताब्दी मनाना बंद करें। लंच-डिनर-दारू गटकने के बहाने और भी हैं। लोकार्पणों में जीमिए। किसी के 75वें में, 80वें या 90वें में रात भर दारू कुट्टिए, पर ‘शताब्द

    20 मई, 2017 11:37 PM Hindi Literature Literary Writers Writers
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    मुझे पता था कि एक दिन ऐसा आएगा कि मंडी हाउस के गोल चक्कर के बीच खडे़ होकर साहित्य बिसूरता हुआ मिलेगा। किशोर कुमार का पुराना गीत गाता हुआ- कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन। वह मंडी हाउस के गोल चक्कर में फ

    14 मई, 2017 12:57 AM Mandi House Sudhir Pachauri Hindi Literature
  • sudhish pachauri

    ‘हिंदी देश की एकता के लिए खतरा है’! ‘हिंदी तानाशाही मुर्दाबाद’! ‘हिंदी देश की बहुभाषिता के लिए खतरा है’! ‘इससे देश टूट जाएगा’! ऐसी बातें सुनकर पहले म

    6 मई, 2017 11:38 PM Hindi Literature Articles By Sudhish Pachauri Sudhish Pachauri
  • ‘हो रहा है जो जहां सो हो रहा...।’ यह हिंदी साहित्य का वह ‘स्थायी’ है, जिसके कारण शेष साहित्य इसका सिर्फ ‘अंतरा’ नजर आता है। और वह हिंदी साहित्य का ‘स्थायी&rs

    29 अप्रैल, 2017 9:44 PM National Poet Literature Poem
  • Hindi Literature

    उन्होंने 20 साल से नहीं लिखा/ उन्होंने 30 साल से नहीं लिखा/ इन दिनों वह कुछ लिखने वाले हैं/ इन दिनों वह कुछ लिख रहे हैं/ सुना है कि उनने इधर कुछ लिखा है/ सुना है कि एक लंबी कविता पर काम कर रहे हैं/ वह

    24 अप्रैल, 2017 4:33 PM Writing Sudhir Pachauri Hindi Literature
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पत्नी तैयार होकर अपने पति से पूछती है : कैसी लग रही हूँ मैं ? 

पत्नी तैयार होकर अपने पति से पूछती है : कैसी लग रही हूँ मैं ? 
पति : कसम से दिल तो कर रहा है कि तुझे पाकिस्तान फेंक आऊँ 
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पति : बम लग रही है बम

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