Live Hindustan
  • Sudheesh Pachauri

    न किसी से वाद कर सका, न विवाद, न संवाद। ऐसा लेखक भी क्या लेखक? लेखक तो वह, जो ‘वादे वादे जायते तत्वबोध:’ के बहाने एक विवाद पैदा कर दे। विवाद से प्रवाद फैलेगा। प्रवाद से वाद बढे़गा। वाद का...

    5 अगस्त, 2017 11:40 PM Tirchi Nazar Column Sudheesh Pachauri अन्य...
  • sudhish pachauri

    जब-जब कवि बनना चाहा, किसी न किसी सत्यानाशी ने मेरे कवि के करियर को चौपट कर दिया। अब यही देख लीजिए- विश्व कविता का बाजार बन रहा था। बजट तय हो गया। कवियों की जेबें गरमाने लगीं। पर दैव दुर्विपाक कि...

    29 जुलाई, 2017 10:12 PM Literature Hindi Literature Poetry अन्य...
  • sudhish pachauri

    भगवान को हाजिर नाजिर मानकर बिना किसी दबाव, बिना किसी भेदभाव और हिंदी साहित्य के हित में कह रहा हूं कि मायामोह के बंधन में बंधे इस नश्वर संसार में कौन प्राणी कितनी देर अस्तित्व रखता है कब उसे...

    22 जुलाई, 2017 10:07 PM Hindi Literature Literature Sudhish Pachauri अन्य...
  • sudhish pachauri

    तीसरी कसम पहले खा चुका हूं, अब चौथी खाने जा रहा हूं कि चाहे कुछ हो जाए, अपने लेखन में आगे से किसी कवि का, कथाकार का, आलोचक का नाम तक न लूंगा। नाम, गांव और शहर की बात छोड़िए, मैं तो उस दिशा तक का जिक्र न...

    16 जुलाई, 2017 12:29 AM Poet Literary Hindi Literature अन्य...
  • sudhish pachauri

    न जाने कितने दिनों से मेरा मन कर रहा है कि अब जंतर मंतर पर बैठ ही जाऊं। जंतर मंतर की महिमा ही कुछ ऐसी है। जो गया, वह अमर हुआ। उसी का नाम हुआ। उसी का काम हुआ। जो भी उस पवित्र-पुण्य फुटपाथ पर बैठ गया...

    8 जुलाई, 2017 10:20 PM Jantar Mantar Literature Hindi Literature अन्य...
  • sudhish pachauri

    अच्छे आलोचक को नंबर वन का झूठा होना चाहिए। अच्छे आलोचक के पास कम से कम दो स्मार्ट फोन होने ही चाहिए। जो चेलों द्वारा जन्मदिन पर दिए होने चाहिए। चेलों को मंच पर ही दो चार बार फोन करने चाहिए ताकि...

    1 जुलाई, 2017 7:05 PM Critic Literature Hindi Literature अन्य...
  • sudhish pachauri

    ये नोबेल के लेवल को क्या हुआ? लगता है कि वह भी हिंदी लेवल का हो गया है। जिस नामी गीत गायक बॉब डिलन को पिछले दिनों नोबेल सम्मान दिया गया, जिसे ‘सम्मान’ के जबाव में ‘धन्यवाद भाषण’ देने के लिए...

    24 जून, 2017 11:13 PM Hindi Literature Literary Theft Of Articles अन्य...
  • sudhish pachauri

    आलोचना के लोचन पूरी तरह से खुले भी न थे कि उसका अंत हो रहा है। एक ही तो धंधा था, जिसे साधा था, लेकिन अब उसे भी जमाने की नजर लग गई। करूं, तो कोई करने नहीं देता; लिखूं, तो कंप्यूटर खुद मना कर देता है कि...

    18 जून, 2017 12:00 AM Critic Sudhir Pachauri Criticism अन्य...
  • sudhish pachauri

    लेखक हो, तो अंग्रेजी वाला। अंग्रेजी का हो, तो थर्ड वर्ल्ड वाला। थर्ड वर्ल्ड वाले में भी इंडिया वाला। इंडिया वाला हो, तो एलीट-एलीट वाला। एलीट हो, तो पांच सितारे वाला। पांच सितारे वाला हो, तो...

    10 जून, 2017 11:57 PM Hindi Hindi Literature English अन्य...
  • sudhish pachauri

    एक प्रश्न रह-रहकर कुलबुलाता रहता है। अकादेमी के गलियारों में सुनाई तो देता है, मगर दिखाई नहीं देता। जब-जब ऐसा होता है, मेरा मन ‘उन्मनी अवस्था’ में पहंुच जाता है। इस कदर ‘उन्मन’ होता है कि...

    3 जून, 2017 11:58 PM Hindi Literature Hindi Articles Literature अन्य...
  • ‘काव्य की आत्मा’ की तलाश में संस्कृत के पंडितों ने हजारों साल तक सिर खपाया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। किसी ने कहा कि काव्य की आत्मा ‘रस’ है। किसी ने कहा ‘अलंकार’ है। किसी ने कहा...

    28 मई, 2017 12:23 AM Poetry Literature Poet अन्य...
  • sudhish pachauri

    शताब्दीबाजों से विनती कर रहा हूं कि अब शताब्दी मनाना बंद करें। लंच-डिनर-दारू गटकने के बहाने और भी हैं। लोकार्पणों में जीमिए। किसी के 75वें में, 80वें या 90वें में रात भर दारू कुट्टिए, पर ‘शताब्द

    20 मई, 2017 11:37 PM Hindi Literature Literary Writers Writers अन्य...
  • sudhish pachauri

    मुझे पता था कि एक दिन ऐसा आएगा कि मंडी हाउस के गोल चक्कर के बीच खडे़ होकर साहित्य बिसूरता हुआ मिलेगा। किशोर कुमार का पुराना गीत गाता हुआ- कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन। वह मंडी हाउस के गोल चक्कर में फ

    14 मई, 2017 12:57 AM Mandi House Sudhir Pachauri Hindi Literature अन्य...
  • sudhish pachauri

    ‘हिंदी देश की एकता के लिए खतरा है’! ‘हिंदी तानाशाही मुर्दाबाद’! ‘हिंदी देश की बहुभाषिता के लिए खतरा है’! ‘इससे देश टूट जाएगा’! ऐसी बातें सुनकर पहले म

    6 मई, 2017 11:38 PM Hindi Literature Articles By Sudhish Pachauri Sudhish Pachauri अन्य...
  • ‘हो रहा है जो जहां सो हो रहा...।’ यह हिंदी साहित्य का वह ‘स्थायी’ है, जिसके कारण शेष साहित्य इसका सिर्फ ‘अंतरा’ नजर आता है। और वह हिंदी साहित्य का ‘स्थायी&rs

    29 अप्रैल, 2017 9:44 PM National Poet Literature Poem अन्य...
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जोक्स: जब भिखारी ने साहब से कहा..

भिखारी: क्या साहब? पहले तो आप 50 रुपये देते थे, बाद में 20 और अब 10 ही देते हो।

पप्पू: पहले मैं कुंवारा था, फिर मेरी शादी हो गई और अब बच्चा हो गया है।

भिखारी: वाह, पूरे परिवार को मेरे पैसों से ऐश करा रहे हो।