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देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ता प्रवासियों का योगदान

jayanti lal

संयुक्त राष्ट्र के कृषि विकास कोष द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में काम कर रहे प्रवासियों द्वारा अपनी कमाई अपने-अपने देशों मे भेजने के मामले में प्रवासी भारतीय पहले नंबर पर हैं। प्रवासी भारतीयों ने वर्ष 2016 में 62.7 अरब डॉलर यानी 4,057 अरब रुपये की धनराशि अपने देश भेजी। ऐसी 40 फीसदी धनराशि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी गई है। प्रवासियों से प्राप्त धनराशि के मामले में चीन दूसरे नंबर पर है। पिछले वर्ष विदेश में काम कर रहे प्रवासियों ने करीब तीन लाख करोड़ डॉलर की धनराशि स्वदेश भेजी, जिसका आधा हिस्सा दस बड़े देशों में कमाया गया है। इनमें अमेरिका, सऊदी अरब, रूस, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, कुवैत, फ्रांस, कतर, ब्रिटेन व इटली शामिल हैं। 

दुनिया के 200 देशों में रह रहे करीब 3.12 करोड़ प्रवासी भारतीयों ने विभिन्न देशों में नई ऊंचाइयों को पाने के लिए भारी संघर्ष किया और अवसरों को खंगाला है। इन भारतीय कारोबारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों की प्रभावी भूमिका दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सराही जा रही है। प्रवासी भारतीय विकसित व विकासशील देशों के सबसे महत्वपूर्ण विकास-सहभागी बन गए हैं। इससे पूरी दुनिया में भारत की नई पीढ़ी की श्रेष्ठता को स्वीकार्यता मिली है। दुनिया के कई राष्ट्र प्रमुखों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं में प्रवासी भारतीयों के योगदान का कई बार उल्लेख किया है। आईटी, कंप्यूटर, मैनेजमेंट, बैंकिंग, वित्त, कारोबार जैसे क्षेत्रों में दुनिया में भारतीय प्रवासी सबसे आगे हैं।

विदेशी धरती पर प्रभावी भूमिका निभाने के साथ-साथ प्रवासी भारतीय अब अपने देश के काम भी आने लगे हैं। कई बार यह पाया गया है कि देश की मुद्रा जब भी कमजोर हुई, तब प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश भेजे गए धन से रुपया स्वत: ही स्थिर होने की ओर बढ़ा। देश के सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के कई बैंकों ने अप्रवासी भारतीय जमा खातों (एफसीएनआर) की ओर प्रवासियों को आकर्षित करके आवश्यकता के अनुरूप विदेशी मुद्रा हासिल की।

हालांकि दुनिया के सभी प्रवासी भारतीय बहुत धनी नहीं हैं। अधिकांश देशों में इनकी आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं है। खासतौर से विभिन्न खाड़ी देशों में लाखों कुशल-अकुशल भारतीय श्रमिक इस बात से त्रस्त हैं कि वहां पर उन्हें न्यूनतम वेतन और जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। केंद्र सरकार ने इस गंभीर पक्ष पर भी ध्यान दिया है। खासतौर से पश्चिम एशिया की हर छोटी-बड़ी उथल-पुथल के बाद जब भारतीय प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ीं, तो भारत मदद करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा। जब इराक ने कुवैत पर कब्जा जमा लिया था, तब रातोंरात वहां काम करने वाले भारतीयों को निकालने का काम भी भारत ने सफलता के साथ किया। इसी तरह, पश्चिम एशिया से थोड़ी सी दूरी पर बसे लीबिया में गृहयुद्ध के दौरान भी भारत ने प्रवासियों को बाहर निकाला और कुछ  समय पहले प्रवासियों की ऐसी ही मदद इराक के उन हिस्सों में भी करनी पड़ी, जहां आईएस के उग्रवादियों ने कब्जा जमा लिया था। फिलहाल कतर में जिस तरह का संकट खड़ा हुआ है, उसमें भी आवश्यकता होने पर वहां रह रहे साढ़े छह लाख से अधिक भारतीयों को तत्काल निकालने के लिए भारत तैयार दिखाई दे रहा है।

निश्चित रूप से यदि हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय भारत की ओर विदेशी मुद्रा के प्रवाह में वृद्धि करें और भारत के विकास के पूर्ण सहभागी बनें, तो हमें प्रवासियों के प्रति सांस्कृतिक सहयोग व स्नेह को और अधिक बढ़ाना होगा। हमें आशा करनी चाहिए कि आने वाले समय में भारत को विकसित देश बनाने में प्रवासियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। तीन दशक  पहले प्रवासी चीनियों ने सारी दुनिया से कमाई हुई अपनी दौलत चीन में लगाकर उसकी तकदीर हमेशा के  लिए बदल डाली थी, उसी प्रकार भारत की तकदीर बदलने में भी प्रवासी भारतीयों से अधिक कारगर सहयोग की उम्मीद है। हालांकि एक दिलचस्प बात यह है कि इस काम को प्रवासी चीनी लोगों ने तब किया था, जब प्रवासियों या उनके धन को आकर्षित करने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए थे। जबकि भारत इसके लिए लगातार प्रयास करता रहा है। भारत का पहले नंबर पर आना इन्हीं प्रयासों की कहानी है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:Contributions of increasing migrants in countrys economy
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