Live Hindustan
  • वह मिलते ही अपना दुखड़ा रोना शुरू कर देते हैं। वह विरले नहीं हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि उनके हिस्से दूसरे से ज्यादा दुख और तकलीफें आती हैं। लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि हम खुद दुख को बुलावा...

    19 सितम्बर, 2017 10:22 PM Mansa Vacha Karmana Neeraj Kumar Tiwari Invitation To Sadness
  • औसतन हर परिवार का एक वंश-वृक्ष होता है। हमारे पूर्वज कौन थे, कहां से आए, कहां बसे और अब कहां हैं? एक विशाल वृक्ष की कई शाखाएं हो गईं। घुमक्कड़ी प्रवृत्ति और जीवन-यापन की मजबूरी के चलते बहुत से...

    18 सितम्बर, 2017 10:33 PM Mansa Vacha Karmana Mahendra Madhukar
  • क्या ऐसा कभी होता है कि दो व्यक्ति मिलें और एक-दूसरे के साथ बिल्कुल चुपचाप बैठे हों? यह दृश्य बड़ा अजीब लगेगा। हां, पति-पत्नी अवश्य एक-दूसरे के साथ मौन बैठे मिलते हैं, पर उसकी वजह कुछ और होती है।...

    17 सितम्बर, 2017 10:15 PM Mansa Vacha Karmana Amrit Sadhna Maun Se Sanvad
  • सुबह ही किसी साथी ने कहा था, ‘यार तुम बेचैन नजर आ रहे हो?’ उन्होंने खट से कहा था, ‘नहीं-नहीं, ऐसा  तो कुछ नहीं।’ ‘अगर बेचैनी है, तो उसे मान लेना चाहिए। उससे भागकर हम कहीं नहीं पहुंचते।’...

    15 सितम्बर, 2017 10:19 PM Rajeev Katara Mansa Vacha Karmana
  • दिमाग और दिल, दोनों के अलग-अलग स्वभाव व कार्य हैं। यदि केवल दिमाग से आगे बढ़ा जाए, तो बुद्धि की प्रधानता दिखती है, वहां भाव व प्रेम का प्रवेश नहीं होता। इसी तरह, यदि सिर्फ दिल से काम लिया जाए, तो...

    14 सितम्बर, 2017 11:27 PM Manasa Vacha Karmana Akhilesh Kumar
  • हम जब मनचाहा काम हासिल कर लेते हैं, तो सबसे पहले अध्ययन करना छोड़ते हैं। लगता है कि अब इसकी जरूरत नहीं रही। सच्चाई यह है कि अपना वजूद, अपनी शख्सियत बनाए रखने के लिए निरंतर अध्ययनरत रहने की...

    13 सितम्बर, 2017 10:22 PM Mansa Vacha Karmana Neeraj Kumar Tiwari
  • वह अपने मित्र से पूछ रहे थे कि कुछ वर्ष पूर्व तक तुम्हारा व्यवसाय नुकसान में जा रहा था, फिर अचानक सफलता की ऊंचाइयों को यूं छू लेना, आखिर तुम्हारी कामयाबी का राज क्या है? मित्र ने कहा- दृढ़ प्रण।...

    12 सितम्बर, 2017 10:37 PM Mansa Vacha Karmana Radha Nacheez Determination
  • लघुता और विराटता का वैसा ही संबंध है, जैसे बूंद और समुद्र का है। जन्म से मृत्यु तक मनुष्य को सुख-दुख के कितने पड़ाव, हर्ष-विषाद के कितने झोंके झेलने पड़ते हैं, फिर भी यह जीवन इतना प्यारा क्यों लगता...

    11 सितम्बर, 2017 11:29 PM Manasa Vacha Karmana Hindustan
  • आपने कितनी बार चाहा होगा कि दुखद स्मृतियों को मिटा दें और सुखद स्मृतियों को बचाकर रखें, लेकिन होता उल्टा है। सुखद स्मृतियां तो मिट जाती हैं और दुखद सघन होती जाती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि हम...

    10 सितम्बर, 2017 10:36 PM Mansa Vacha Karmana Amrit Sadhna
  • दोस्त का फोन था। ‘कैसे हो यार!’ वह कुछ बोलते, उससे पहले ही दोस्त ने कहा, ‘बिजी...।’ उनका रोम-रोम खुश हो गया। बोले, ‘हां यार, अपने लिए भी वक्त नहीं मिलता अब।’  ‘व्यस्त रहना तो ठीक है,...

    8 सितम्बर, 2017 10:21 PM Manasa Vacha Karmana Sachmuch Busy Ho Hindustan
  • अपनी सोच पर सवाल उठते ही हमारा घबरा जाना हमारे विकास का एक आंतरिक अवरोध है। सवाल उठना समस्या नहीं, हमारे विकास की सीढ़ी है। नोबेल पुरस्कार विजेता इम्रे कोर्टेश कहते हैं कि मैं अपने विचारों के...

    7 सितम्बर, 2017 10:45 PM Manasa Vacha Karmana Hindustan Respect Of Views
  • कई लोग इतना बोलते हैं, जैसे बोलने के लिए ही पैदा हुए हों और कई मात्र नाम के लिए ही बातें करते हैं। ज्यादातर लोग सुनने की बजाय बोलने में विश्वास करते हैं। शायद इसीलिए कहा जाता है कि आज बोलने...

    7 सितम्बर, 2017 12:22 AM Manasa Vacha Karmana Hindustan
  • आप घर से निकलते हैं, मेट्रो या बस या दफ्तर में आपका कई तरह के लोगों से सामना होता है। कुछ खुश व उत्साही दिखते हैं, जबकि कुछ उदास और खोए-खोए भी नजर आते हैं। हालांकि ऊपरी तौर पर वह सहज दिखने की कोशिश...

    5 सितम्बर, 2017 10:25 PM Mansa Vacha Karmana Feeling Of Hapiness Shashiprabha Tiwari
  • वर्तमान हमेशा ज्यादा सुंदर होता है। इसलिए हमें वर्तमान में रहने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन इतना भर पर्याप्त नहीं। ‘क्या है देखना’ तभी शानदार होता है, जब आप साथ-साथ यह भी देख सकें कि आगे...

    4 सितम्बर, 2017 10:38 PM Mansa Vacha Karmana Towards Future Neeraj Kumar Tiwari
  • हर रोज कामों की लंबी फेहरिस्त हमारे सामने होती है। हम वामन की तरह दो-तीन पगों में सारी दुनिया नाप लेना चाहते हैं, समुद्र की थाह लेते हैं, ग्रहों-उपग्रहों की यात्राएं कर आते हैं। कई तो ऐसे हैं, जो...

    3 सितम्बर, 2017 10:58 PM Table Bound World Geeta अन्य...
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गुड्डू: नौकरी में आके अब मन कर रहा है कि मैथ्स के टीचर से मिलूं...

गुड्डू: नौकरी में आके अब मन कर रहा है कि

एक दिन मैथ्स के टीचर से मिलूं और पूछूं...

सर जी..

आपने हमें जो साइन, कॉस, थीटा, अल्फा, लेमडा, तेमडा, अदरक, लहसुन जो पढ़ाया था... 

उसका अब इस्तेमाल कहां करूं...