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उत्तर कोरिया के जुनून से चिंतित दुनिया

Former Minister Rajeev Shukla

उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग-उन आज पूरे विश्व के लिए खतरा बन गया है। कुछ दिनों पहले जिस तरह पूरे विश्व को धता बताकर उसने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया, वह चिंता का विषय है। एक हाइड्रोजन बम दुनिया के बहुत बड़े हिस्से को ध्वस्त कर सकता है। किम जोंग-उन की सनक पर किसी का नियंत्रण नहीं है। वह एक ऐसा युवक है, जो किसी की नहीं सुनता। हालत यह है कि अब उसके पड़ोस में बैठा रूस भी अंदर-अंदर डर रहा है और शायद यही वजह है कि पुतिन ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह उत्तर कोरिया पर हमले की सोच छोड़कर बातचीत के जरिये कोई रास्ता निकाले। चीन भी इस बात से दहशत में है कि यदि नादानी में इस बेलगाम नौजवान ने गलत फैसला लेकर परमाणु बम का इस्तेमाल कर दिया, तो दुनिया कहां जाएगी! उत्तर कोरिया के एक तरफ चीन और दूसरी तरफ रूस है, बीच में यूक्रेन भी पड़ता है। 

कॉमरेड किम इल सुंग का पोता किम जोंग-उन अपने दादा से एकदम उलट है। किम इल सुंग क्रांतिकारी नेता थे, जिन्होंने जंगलों में रहकर संघर्ष के जरिए उत्तर कोरिया में कम्युनिस्ट राज स्थापित किया था। उनके त्याग के लिए ही जनता भी उन्हें भगवान की तरह मानती थी। भारत से उन्हें विशेष लगाव था, इसलिए 30 वर्ष पहले अक्सर उनके विज्ञापन भारतीय अखबारों में हिंदी भाषा में भी छपते थे। उनका बेटा किम जोंग-इल बाद में राष्ट्रपति बना। लोग किम इल सुंग को ‘ग्रेट लीडर’ और किम जोंग-इल को ‘डियर लीडर’ कहते थे। लेकिन पोता जिस रास्ते पर है, वह उत्तर कोरिया को तबाही की तरफ ले जाएगा। 

दरअसल, उत्तर कोरिया के बारे में लोग कम जानते हैं, इसलिए इसके बारे में कोई अनुमान भी मुश्किल है। विश्व के एक कोने में अलग-थलग पड़े इस देश में न कोई पर्यटक जाता है और न विश्व व्यापार के लिए कोई कंपनी। इसने अपने आप को जान-बूझकर बाकी दुनिया से अलग कर रखा है और नहीं चाहता कि उसके यहां किसी अन्य देश की संस्कृति का प्रवेश हो। वह अपने लोगों को भी मुश्किल से विदेश जाने की इजाजत देता है। कम्युनिस्ट देशों के साथ उनके रिश्ते और आवाजाही है, लेकिन वह भी एक निश्चित सीमा तक ही संभव है। उत्तर कोरिया अपने ढंग का अनोखा देश है, जो अपने हितों के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। मुझे तकरीबन एक महीने तक उत्तर कोरिया में रहने का अवसर मिला। इस दौरान पूरे देश को तो बारीकी से देखा-समझा ही, वहां के लोगों और सरकार की सोच का भी पता चला। 

सच है कि इस देश में तमाम अकल्पनीय अच्छाइयां हैं, लेकिन यही अच्छाइयां कुछ कारणों से विश्व के लिए घातक भी हो सकती हैं। वहां यूरोप या अमेरिका का एक भी व्यक्ति नजर नहीं आता, क्योंकि उत्तर कोरिया को पश्चिमी देशों से सख्त नफरत है। अमेरिका व दक्षिण कोरिया को वे अपना दुश्मन मानते हैं। दक्षिण कोरिया को बात-बात पर भला-बुरा कहते हुए अमेरिका का पिट्ठू बताया जाता है। देश में टीवी के नाम पर एकमात्र सरकारी टेलीविजन है, जिसमें सरकार अपने ढंग से कार्यक्रमों का चयन करके दिखाती है। ज्यादातर कार्यक्रम अपने देश की तारीफ में और पूर्व राष्ट्रपति किम इल सुंग और मौजूदा राष्ट्रपति के गुणगान के होते हैं। विदेशी फिल्में दिखाने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। हां, कभी-कभी रूसी, चीनी और भारतीय फिल्में जरूर दिख जाती हैं। भारतीय फिल्मों में आज भी राज कपूर की पुरानी फिल्में देखने को मिल जाएंगी। दिन भर अपने नेता के बारे में बता-बताकर उत्तर कोरिया के लोगों को ऐसा बना दिया गया है कि उनका दिमाग अपने देश और अपने नेता से आगे कुछ सोच ही नहीं सकता है। कोई भी वाक्य शुरू करने से पहले वहां के लोग अपने राष्ट्रपति की प्रशंसा करते हैं और हर नागरिक उनके चित्र का बैज लगाए रहता है। उनके लिए उनके नेता से बड़ा कोई नहीं है और उनसे अच्छा देश विश्व में कोई हो ही नहीं सकता है। यह बात वहां के बच्चे-बच्चे के दिमाग में ठूंस दी गई है। 

हां, एक महत्वपूर्ण बात जरूर है और इससे हमारे देश के लोगों को सीखना चाहिए। राष्ट्रभक्ति इस हद तक हो सकती है, यह कोई उत्तर कोरिया से सीखे। नतीजा यह कि उस देश में अपराध न के बराबर है। हत्या, लूट, चोरी का तो लोग नाम भी नहीं जानते। घरों में ताले तक नहीं लगते हैं। उत्तर कोरिया सरकार का दावा है कि जब हम बाहरी टीवी चैनल और अखबार आने ही नहीं देंगे, तो लोग अपराध सीख ही नहीं पाएंगे। मैं ट्रेन से राजधानी से 600 किलोमीटर दूर एक हिल स्टेशन पर गया और अपना सूट ट्रेन के डिब्बे में भूलकर उतर गया। ट्रेन आगे चली गई, आठ दिनों बाद वापस आने के लिए वही ट्रेन लेनी पड़ती है। देखकर ताज्जुब हुआ कि उस डिब्बे में उसी जगह मेरा सूट किसी ने अच्छी तरह तह करके हैंगर से लटकाकर रख दिया था। हजारों यात्री चढ़े-उतरे होंगे, लेकिन किसी ने सूट को नहीं छुआ। ऐसा शायद किसी अन्य देश में संभव नहीं है। यही नहीं, कितना ही बड़ा अफसर या नेता हो, अपने सरकारी दफ्तर से काम खत्म करके आने के बाद वह देखता है कि उसके घर के पास कहीं कोई सरकारी भवन या इमारत तो नहीं बन रही है। वह वहां जाकर दो घंटे देश-सेवा जरूर करेगा। मतलब मुफ्त में मजदूरी करके ईंट, सीमेंट, सरिया ढोकर उस भवन को बनाने में मदद करेगा। इस तरह, अपने काम के अलावा स्वेच्छा से हर शाम दो घंटा हर व्यक्ति देश-सेवा करता है। 

असल में देशभक्ति का यह जुनून ही विश्व के लिए चिंता का विषय है। उत्तर कोरिया के लोग दुनिया के बाकी लोगों के बारे में कुछ नहीं सोचते। उनके मन में केवल अपना देश, अपना नेता है। उन्हें यदि लगा या उन्हें समझा दिया गया कि उनके देश के लिए जरूरी है कि दक्षिण कोरिया या अमेरिका पर बम गिरा दिया जाए, तो वे गिरा देंगे। उन्हें यदि समझा दिया जाए कि अमेरिका व दक्षिण कोरिया को सबक सिखाना है, तो परमाणु बम आतंकियों को दे दो, तो वे दे देंगे। वे देशहित के नाम पर कुछ भी करने को तैयार हैं। विश्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी का उन्हें कोई एहसास नहीं है। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:Editorial Article on North Korea in Hindustan Hindi News Paper by Former minister Rajeev Shukla
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