Live Hindustan
  • भारतीय नगर जो हो सकता है साहित्य का विश्व शहर 

    कुछ लोगों का मानना है कि अब छपे हुए शब्दों का अवसान हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए तैयार सामग्री उनका स्थान ले रही है। मगर पिछले कुछ वर्षों में यूनेस्को द्वारा विश्व के बीस शहरों को ‘साह

  • कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो समझाने पर भी समझ नहीं पाते या समझना नहीं चाहते। जो समझना नहीं चाहता, उसे समझाया नहीं जा सकता। कहावत है कि आप घोड़े को पानी तक ले जा सकते हैं, किंतु उसे पानी पीने के लिए बाध्य न

  • क्या रजनीकांत को रास आएगी राजनीति

    दशकों तक तमिल सिनेमा के महानायक रहे रजनीकांत क्या राजनीति में प्रवेश करेंगे? पहले भी ऐसे कई मौके आए, जब सियासत में उनके उतरने को लेकर जोरदार अटकलें लगाई गईं, मगर आज जितनी अपेक्षित वे कभी नहीं लगीं। इस

  • बिना वीटो की सदस्यता किस काम की

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार-प्रक्रिया को गति देने के लिए भारत सहित जी-4 के अन्य देशों ब्राजील, जर्मनी और जापान को शुरुआती तौर पर वीटो पावर छोड़ने की पेशकश की गई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत

  • निराशाजनक त्रैमास में आने वाली फिल्मों से उम्मीद

    अगर बाजार नहीं है, तो सिनेमा का अर्थ क्या है? सिनेमा का अर्थ से बड़ा गहरा रिश्ता है। सबसे ज्यादा चकाचौंध, सबसे ज्यादा ग्लैमर, सबसे ज्यादा वैभव और सबसे ज्यादा रईसी यदि हमारे यहां बाजार-व्यवसाय के किसी म

  • कहा जाता है कि मानव भी अजीब चीज है, पहले धन कमाने के लिए अपने स्वास्थ्य गंवाता है और फिर उसी स्वास्थ्य को पाने के लिए अपना धन खोता है। सदा से कहते-सुनते आ रहे हैं कि इस दुनिया का सबसे बड़ा व सबसे पहला

  • बात दी और दा के जमाने की

    दी और दा वे कूट पद हैं, जिनको हिंदी में जमकर कूटा गया है। ये इसलिए बने हैं कि लोग इनकी फुल फॉर्म से डरते हैं। फुल फॉर्म बोलते ही अर्थ का अनर्थ हो उठता है। इसीलिए इनकी फुल फॉर्म हिंदी में वर्जित मानी ग

  • विदेश नीति का प्रगति काल

    मुझे अपने काम के सिलसिले में रिटायर प्रशासकों, राजनयिकों के संस्मरण गाहे-बगाहे पढ़ने ही पड़ते हैं। ज्यादातर नीरस होते हैं। कई बार तो अत्यंत तात्कालिक। मामूली गलतियों पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। लेकिन

  • निराधार नहीं हैं आधार पर उठ रही आशंकाएं

    हाल में ही टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की निजी जानकारी आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर लीक कर दी। इस पर जब हंगामा हुआ, तो जानकारी लीक करने वाली एजेंसी को 10 सा

  • भारतीय, जिन्होंने अमेरिका की समृद्धि में योगदान दिया

    इन दिनों भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ अमेरिका में कुछ जगह नस्लभेदी हिंसा की घटनाएं हो रही हैं, जिनके कारण अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के मन में तो रोष है ही, भारत की आम जनता भी बहुत उद्वेलि

  • उद्योग से बड़ी है सेहत की चिंता

    सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मार्च को जो फैसला सुनाया, वह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता के पीठ ने ऑटोमोबाइल निर्माताओ

  • कुछ भी करने के लिए आत्मविश्वास जरूरी है। आज के प्रतियोगी जीवन में इसकी जरूरत कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। आत्मविश्वास का अर्थ है- अपनी मानसिक शक्ति पर विश्वास करके उसका सदुपयोग करना। इसके लिए अभ्यास की आवश

  • गिलगित-बाल्टिस्तान की सांविधानिक स्थिति को बदलते हुए उसे पाकिस्तान का पांचवां सूबा बनाने का प्रस्ताव कोई नया नहीं है। कश्मीर के इस हिस्से पर भारत का दावा है, मगर अभी इस पर पाकिस्तान का कब्जा है। साल 2

  • भारतीय मूल के रंगभेद-विरोधी महान नेता अहमद कथराडा नहीं रहे। वह नेल्सन मंडेला, वाल्टर सिसलू और डेसमंड टूटू के साथ दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी संघर्ष के प्रसिद्ध नेतृत्व का हिस्सा थे। रंगभेद के खिला

  • उनका तकिया कलाम है- मैं शोहरत नहीं चाहता। अच्छे काम को लेकर किसी की तारीफ पर उनके बोल होते हैं- मैं भी ऐसा कर सकता हूं, पर मुझे नाम नहीं चाहिए। कोई प्रसिद्धि न चाहे, यह अच्छी बात है, मगर केवल इसलिए अच

मैं तो स्मार्ट फोन को उस दिन ...

मैं तो स्मार्ट फोन को उस दिन स्मार्ट मानूंगी जब मैं चिल्लाऊंगी के हमाओ फोन कहां ? और फोन आवाज लगाएगा: जे हैं जिज्जी हम, खटिया के नीचे परे हैं।