Live Hindustan
  • जब कभी सुरक्षा बलों पर माओवादी विद्रोही कोई बड़ा हमला करते हैं, जैसा कि छत्तीसगढ़ के दक्षिणी इलाके में बीते 25 अप्रैल को हुआ है, जिसमें सैकड़ों विद्रोहियों के हाथों सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हुए हैं, तो क

  • किसी एक चुनावी जीत या हार से किसी भी राजनीतिक दल के भविष्य का अंदाज नहीं लगाया जा सकता। यह बात जितनी भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस या माकपा-भाकपा जैसे राष्ट्रीय दलों पर लागू होती है, उतनी ही बसपा, सपा,

  • अपनी ही नादानियों का मारा यूएन

    अमेरिका के सनकी लोगों द्वारा विदेशी साजिश की जिन तमाम कहानियों का अनुमोदन किया जाता रहा है, उनमें से एक कहानी मुझे अक्सर ठहाके लगाने को बाध्य करती है। यह कहानी इस धारणा की उपज है कि संयुक्त राष्ट्र एक

  • परंपरागत तरीकों से सूखे की समस्या को मात देते लोग

    अभी देश से मानसून बहुत दूर है और भारत का बड़ा हिस्सा सूखे, पानी की कमी व पलायन से जूझ रहा है। बुंदेलखंड के तो सैकड़ों गांव वीरान होने शुरू भी हो गए हैं। एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक, देश के लगभग सभी हिस्स

  • एक दिन उन्होंने गौर किया कि उनके जो जानने-पहचानने वाले हैं, वे भी उनके प्रति निरपेक्ष से रहते हैं। वह क्या करते हैं, क्या सोचते हैं, यह दूसरों के लिए मायने नहीं रखता। आखिर वजह क्या थी? दरअसल, हमारी जन

  • न लिखने के सुख

    उन्होंने 20 साल से नहीं लिखा/ उन्होंने 30 साल से नहीं लिखा/ इन दिनों वह कुछ लिखने वाले हैं/ इन दिनों वह कुछ लिख रहे हैं/ सुना है कि उनने इधर कुछ लिखा है/ सुना है कि एक लंबी कविता पर काम कर रहे हैं/ वह

  • पहलू खान और मशाल खान

    पचपन साल के पहलू खान और तेईस वर्षीय मशाल खान में खान उपनाम के अतिरिक्त क्या समानता हो सकती है? अलवर जिले के बहरोड़ कस्बे में एक अप्रैल को निर्ममता से गोरक्षकों द्वारा कत्ल किए गए पहलू खान और पेशावर के

  • क्या डोनाल्ड ट्रंप खत्म कर देंगे अमेरिका के पुस्तकालय

    अमेरिका में नौ अप्रैल को ‘नेशनल लाइब्रेरी वीक’ शुरू ही हुआ था कि ट्रंप प्रशासन ने इंस्टीट्यूट फॉर लाइब्रेरी ऐंड म्यूजियम सर्विसेज यानी ‘आईएलएमएस’ का बजट ही खत्म करने का प्रस्ता

  • भगवान बुद्ध का मध्य-मार्ग मानव समाज को सही दिशा प्रदान करता आया है। नाटककार रामवृक्ष बेनीपुरी ने लिखा था- वीणा के तार को इतना मत कसो कि तार ही टूट जाए, न इतना ढीला छोड़ो कि स्वर ही न निकले। जीवन की गति

  • स्टार्ट-अप में उतार-चढ़ाव का दौर

    स्टार्ट-अप के फंडिंग राउंड्स यानी निवेश जुटाने की कवायद को लेकर न्यूजरूम खासे, और कभी-कभी तो जुनूनी होने की हद तक उत्साहित रहते हैं। मेरा अखबारी दफ्तर भी इससे अछूता भला कहां है!  निश्चय ही, नि

  • पंचायती राज से विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए

    पंचायती राज व्यवस्था स्थानीय स्वशासन का एक विशिष्ट स्वरूप है। हमारे यहां पंच-परमेश्वर की अवधारणा रही है और हमारी संस्कृति में इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। औपनिवेशिक शासन ने हालांकि इस पर भी प्रतिकूल प्रभा

  • जिससे भय लगे, उससे सभी भागते हैं, उससे बचना चाहते हैं। या फिर भय को भीतर दबाते हैं और ऊपर से दिखाते हैं कि आप बिल्कुल भयभीत नहीं। दोनों ही हालत में आप भय को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि उससे पीठ फेर

  • सिर्फ विलाप से नहीं बचेगी धरती

    अर्थव्यवस्था, राजनीति और प्रकृति के नजरिये से पिछला साल काफी उथल-पुथल वाला वर्ष रहा। ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर निकला, डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुने गए और अनियमित मौसम व असमय बारिश से प

  • पनामागेट मामले में हमारी चाल इतनी सुस्त क्यों

    हमारे देश में हरेक व्यक्ति के मन में यह सवाल कौंध रहा है कि आखिर जिस पनामा पेपर लीक मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कुरसी जाते-जाते बची, उस मामले में हमारे यहां अब तक क्या हुआ? सवाल व

  • तमाम लोगों के सामने उन्हें क्या नहीं कहा गया? वहां कुछ नहीं बोले वह। लेकिन उन्हें कहीं से नहीं लग रहा था कि उनकी गलती है। ‘अपनी गलती मान लेना बहुत मुश्किल होता है। मगर उसे माने बगैर हम आगे नह

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मैं तो स्मार्ट फोन को उस दिन ...

मैं तो स्मार्ट फोन को उस दिन स्मार्ट मानूंगी जब मैं चिल्लाऊंगी के हमाओ फोन कहां ? और फोन आवाज लगाएगा: जे हैं जिज्जी हम, खटिया के नीचे परे हैं।