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सोमवार, 24 अप्रैल, 2017 | 23:00 | IST
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संपादकीय
जब भी हम प्लास्टिक के खतरनाक पहलुओं के बारे में सोचते हैं, तो एक बार अपने देश की उन गायों को जरूर याद करते हैं, जो पेट में पॉलीथिन जमा होने के कारण जान गंवा देती हैं।
 
निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की विषय-वस्तु के साथ उठे विवाद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने देश भर के स्कूलों को किताब, कॉपियां और यूनीफॉर्म की बिक्री से किसी भी रूप में न जुड़ने और एनसीईआरटी की किताबों के ही इस्तेमाल का सख्त आदेश दिया है।
 
ब्लॉग - शशि शेखर
कुल्हाड़ी पर पैर मत रखिए
लोकतंत्र के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्थाओं की आन और आबरू खतरे में पड़ती जा रही है। ताजा मामला भारत के निर्वाचन आयोग का है। कुछ लोग अपनी घिसी-पिटी राजनीति के चलते चुनाव क्या हारे कि उन्होंने बावेला मचाना शुरू कर दिया।
 
इरादों और इकबाल का इम्तिहान
वह एक सुखद घटना थी। छोटी-मोटी बातों पर तू-तू, मैं-मैं करने वाले हमारे सांसद एक ही सुर में बोल रहे थे। वजह?
 
आप की राय
रेल हादसों को रोकने के लिए सरकार को महत्वपूर्ण कदम उठाने ही होंगे, क्योंकि देश में अंतर-राज्यीय परिवहन का सबसे बड़ा साधन रेल है। हर रोज सवा दो करोड़ से ज्यादा यात्री इससे सफर करते हैं।
 
एमसीडी चुनावों में पिछले एक दशक से सत्तारूढ़ भाजपा आज जिन मुद्दों पर जनता से वोट मांग रही है, वह अत्यंत हास्यास्पद और शर्मनाक है।
 
यह दुख और दुर्भाग्य की बात है कि दिल्ली निगम चुनाव में तेजी से बढ़ते जाम, सरकारी भूमि के अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, ध्वनि व वायु प्रदूषण और सड़कों पर आवारा पशुओं के डेरे आदि जैसे असली मुद्दे प्राय: सभी पार्टियों के घोषणापत्र व प्रोग्राम से गायब हैं।
 
रू-ब-रू
सन 1983 में मैं पंडित रवि शंकर जी का शिष्य बना। उन्होंने मुझे ‘गंडा’ बांधा। उन्होंने कहा- तुम तो कार्यक्रम करने वाले कलाकार हो, तुम्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं।
 
पिताजी संगीत सिखाने को लेकर बहुत कड़क स्वभाव के थे। वह पिता अपनी जगह पर थे, लेकिन जब सिखाने के लिए गुरु की जगह पर बैठते, तो फिर सिर्फ गुरु रह जाते थे। फिर बाप-बेटे का रिश्ता कोई मायने नहीं रखता था।
 
मेरा बचपन दूसरे बच्चों से काफी अलग बीता है। बचपन में अमूमन बच्चे स्कूल जाते हैं, पढ़ाई करते हैं, लेकिन मैंने यह नहीं किया। मैंने अपनी पढ़ाई खुद से की है, यानी ‘सेल्फ स्टडी’।
 
कॉलम
स्टार्ट-अप में उतार-चढ़ाव का दौर
स्टार्ट-अप के फंडिंग राउंड्स यानी निवेश जुटाने की कवायद को लेकर न्यूजरूम खासे, और कभी-कभी तो जुनूनी होने की हद तक उत्साहित रहते हैं। मेरा अखबारी दफ्तर भी इससे अछूता भला कहां है!
 
पंचायती राज से विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए
पंचायती राज व्यवस्था स्थानीय स्वशासन का एक विशिष्ट स्वरूप है। हमारे यहां पंच-परमेश्वर की अवधारणा रही है और हमारी संस्कृति में इसकी जड़ें काफी गहरी हैं।
 
जिससे भय लगे, उससे सभी भागते हैं, उससे बचना चाहते हैं। या फिर भय को भीतर दबाते हैं और ऊपर से दिखाते हैं कि आप बिल्कुल भयभीत नहीं। दोनों ही हालत में आप भय को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि उससे पीठ फेर रहे हैं।
 
उन्होंने 20 साल से नहीं लिखा/ उन्होंने 30 साल से नहीं लिखा/ इन दिनों वह कुछ लिखने वाले हैं/ इन दिनों वह कुछ लिख रहे हैं/ सुना है कि उनने इधर कुछ लिखा है/ सुना है कि एक लंबी कविता पर काम कर रहे हैं/ वह अपने उपन्यास पर काम कर रहे हैं...।  
 
जीने की राह
डर से पगड़ी पहनना नहीं छोड़ सकता
अमेरिका में 9/11 के हमले के बाद सिख होने की वजह से अपमान सहना पड़ा। लेकिन मैं डरा नहीं। हर किसी को अपने धर्म के हिसाब से जीने की आजादी होनी चाहिए। इसके लिए लोगों को जागरूक करना होगा।
 
यूं दूर न करें अपनी खुशियां
हम सबकी यही कोशिश रहती है कि हमारा हर पल खुशियों से भरपूर हो। आमतौर पर अपनी खुशियां बढ़ाने की हम हर संभव कोशिश भी करते हैं। पर परेशानी यह है कि हमें मालूम ही नहीं होता कि हम खुशियां बटोरने की जगह खुद ही उन्हें रौंदते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
 
फालतू पेड़
कड़ी गर्मियों के दिन थे। दो दोस्त एक नीम के पेड़ के नीचे जा बैठे। कुछ देर बैठने के बाद एक ने दूसरे से कहा, ‘दोस्त, यह पेड़ तो एकदम बेकार है। इस पर कोई फल नहीं आता।
 
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