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बरसात में हेपेटाइटिस और किड़नी की खराबी का अधिक खतरा

बरसात में हेपेटाइटिस और किड़नी की खराबी का अधिक खतरा

दूषित भोजन और पानी के सेवन से हेपेटाइटिस ए और ई तथा एक्यूट किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चों में ऐसी बीमारियां अधिक होती हैं। इसलिए अभिभावकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। रविवार को वीरचंद पथ स्थित एक होटल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पीएमसीएच के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. पंकज हंस और गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संजीव ठाकुर ने ये बातें कही। डॉक्टरों ने बताया कि बरसात में कटे फल, खुले में रखे भोजन आदि में संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए ऐसे भोज्य पदार्थ के सेवन से बचना चाहिए। हेपेटाइटिस होने का पहला लक्षण है कि मरीज को जॉंडिस हो जाता है। भूख कम लगता है तथा शरीर में दर्द होने लगता है। डॉ. संजीव ठाकुर ने कहा कि हेपेटाइटिस बी सबसे अधिक खतरनाक है। टीका लगाने पर 80 प्रतिशत बीमारी नहीं होने का खतरा रहता है। टीका लगवाने के बाद दो माह के अंदर जांच भी करा लेनी चाहिए कि टीका शरीर को रक्षक के रूप में काम कर रहा है कि नहीं। हेपेटाइटिस बी से सूबे में लगभग 20 हजार लोगों की हर साल मौत हो जाती है। इसलिए बचाव के लिए रक्तदान देने और खून लेने के पहले जांच जरूरी है। इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन का किसी भी प्रकार से इस्तेमाल न करें। नाई की दुकान पर नया ब्लेड से ही दाढ़ी बनवाएं। डॉ. पंकज हंस का कहना है कि बरसात में दूषित भोजन और पानी के कारण किडनी पर अधिक बल पड़ता है। सूबे में 17 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। इसलिए साफ पानी और भोजन करें। किडनी की प्रारंभिक बीमारी होने पर नेफ्रोलॉजिस्ट के अलावा फिजिशियन से भी दिखाया जा सकता है। छोटे बच्चों का भी ब्लडप्रेशर, यूरिन में प्रोटीन की मात्रा की जांच जरूर कराएं। खासकर वैसे माता-पिता जो मधुमेह से पीडित हैं।

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  • Web Title:Risk of Hepatitis and Kidney Disease in Rains
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