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बरमसिया में बड़ी वारदात को अंजाम देने में जुटे थे नक्सली

सुरक्षाबल चौकन्ने नहीं होते तो नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देने में कामयाब रहते। समय रहते सुरक्षाबलों को जमुई- लखीसराय सीमा पर बरमसिया में नक्सलियों के जमावड़े की सूचना मिली और उसने सफलतापूर्वक अभियान को अंजाम दिया। बताया जाता है कि बरमसिया के जंगल में नक्सलियों का बड़ा दस्ता पहुंचा था। इसमें दूसरे राज्यों के नक्सली और उनके बड़े नेता भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक बरमसिया और गुरमाहा के जंगल में जहां सुरक्षाबलों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई, वहां नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में शामिल निलेश के आने की भी बात कही जा रही है। निलेश प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी का सदस्य बताया जाता है। इस बाबत पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के अधिकारी छानबीन में जुटे हैं। निलेश की बिहार में मौजूदगी से इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि नक्सली किसी बड़ी साजिश के तहत वहां जमा हुए थे। पीएलजीए ने संभाल रखा था मोर्चा नक्सलियों के पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का दस्ता जंगल में मौजूद था। जो दो नक्सली मुठभेड़ में मारे गए उन्होंने बजाप्ता पीएलजीए की बैच लगी वर्दी पहन रखी थी। सुरक्षाबलों को आशंका है कि मारे गए नक्सली बिहार के बाहर के हैं। बताया जाता है कि मारे गए नक्सली अपने साथियों की सुरक्षा में अग्रिम मोर्चे पर थे। चिराग की भरपाई नहीं हो रही सूत्रों के मुताबिक पूर्वी बिहार-पूर्वोंत्तर झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी की मिलीट्री कमीशन का हेड रहे नक्सली चिराग के मारे जाने से नक्सलियों को करारा झटका लगा है। पिछले साल मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने उसे मार गिराया था। चिराग ने जिस तरह से इस इलाके में अपनी पकड़ बना रखी थी, वैसा दूसरे नक्सली नहीं कर पा रहे। वहीं नक्सली संगठन में शामिल स्थानीय लड़ाके बाहरी व्यक्ति को अपने नेता के तौर पर स्वीकार नहीं करना चाहते।

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  • Web Title:Naxalites mobilized in Baramasiya for bigger incident
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