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विधायकी मामले में पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह की याचिका खारिज

पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह की विधायकी समाप्त करने के फैसले पर पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। साथ ही उनकी ओर से दायर एलपीए (अपील) को खारिज कर दिया। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह की ओर से दायर अपील पर सुनवाई की। गौरतलब है कि नरेंद्र सिंह 2012 विधान परिषद चुनाव में जदयू से निर्वाचित हो विधायक बने थे। इनका कार्यकाल 6 मई, 2018 तक था। उनके खिलाफ 2 नवंबर, 2015 को पार्टी विरोधी गतिविधियों में होने का आरोप लगाकर एक आवेदन विधान परिषद के अध्यक्ष को दिया गया, जिसमें कहा गया कि जदयू के सदस्य रहते हुए 2016 के लोकसभा चुनाव में हम पार्टी के लिए चुनाव प्रचार सहित उनकी चुनाव प्रक्रिया में भाग लिए। संविधान की दसवीं अनूसूची के तहत सदन का कोई भी सदस्य अपनी पार्टी के खिलाफ कार्य करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है। स्पीकर ने नरेंद्र सिंह को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। बाद में उनकी सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया। स्पीकर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई । हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति किशोर कुमार मंडल की एकलपीठ ने 26 अप्रैल, 2016 को जारी अपने आदेश में नरेंद्र सिंह की अर्जी खारिज कर स्पीकर के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। एकलपीठ के फैसले को अपील दायर कर चुनौती दी गई। अपील पर खंडपीठ ने सुनवाई कर फैसले में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं पाते हुए अर्जी खारिज कर दी।
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  • Web Title: former minister narendra singh's petition rejected
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