class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हथिया की हल्की वर्षा ने किसानों को दी बड़ी राहत

हथिया की हल्की बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। पानी की कमी से झुलस रहे धान के पौधों में जान आई है, लेकिन अब भी राज्य में 14 प्रतिशत वर्षा की कमी है और किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। एक पखवारा भी नहीं हुआ कि राज्य की अधिसंख्य नदियां लाल निशान के पार थी। बागमति अब भी कई स्थानों पर अपना तेवर बरकरार रखे हुए है।

बावजूद एक दर्जन जिले अभी सूखे की चपेट में हैं। इन जिलों में 20 प्रतिशत या उससे अधिक वर्षा की कमी है। यह आंकड़ा नवादा जिला में तो तीस प्रतिशत से भी ज्यादा है। केवल मधुबनी, दरभंगा और किशनगंज जिले में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। दूसरे सभी जिलों में पानी की कमी है। राज्य में शुरू में मौसम ने खूब साथ दिया और किसानों ने समय पर रोपनी कर ली। लगभग 99.07 प्रतिशत खेतों में धान की रोपनी हो गई, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया मौसम का मिजाज भी बदलने लगा।

नेपाल में हुई वर्षा के कारण राज्य की नदियां ऐसी उफनाई कि लगभग सात लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल डूब गई। उधर, जहां खेतों में बाढ़ नहीं आई वहां पटवन की समस्या खड़ी हो गई, क्योंकि वर्षा हुई नहीं। ऐसी जगहों पर किसान पंपसेट के सहारे खेतों का पटवन कर रहे हैं। लिहाजा दोहरी मार झेल रहे किसानों को एक बार फिर निराशा हाथ लग सकती है। राज्य में एक दर्जन से अधिक जिले ऐसे हैं, जहां 20 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी है।

खास बात यह है कि धान के लिए पानी की सबसे अधिक जरूरत अगस्त और सितम्बर में होती है। अगस्त के मध्य में तो वर्षा की कमी राज्य में 40 प्रतिशत से अधिक थी। बाद में कुछ पानी हुआ तो स्थिति सुधरी। खेती और वर्षा के अंकड़े 34.18 लाख हेक्टेयर में लगी है धान की फसल 4.09 लाख हेक्टेयर में लगी है मक्का की फसल 8.10 लाख हेक्टेयर में बाढ़ से नुकसान हुई फसल 14 प्रतिशत कमी है राज्य में वर्षा की

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Farmers gets relief with rain of Hathia nakshatra
विक्रम बाजार खंड में सड़क मरम्मति को मिली मंजूरीकेंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने राहत सामग्री रवाना किया