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सूबे के फर्जी शिक्षण संस्थानों की जांच के लिए कमेटी गठित

बिहार में धड़ल्ले से चल रहे फर्जी शिक्षण संस्थानों की जांच करने के लिए पटना हाईकोर्ट ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। अदालत ने केंद्र सरकार के एडिशनल सालिसिटर जनरल एसडी संजय सहित केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के अलावा आयुष विभाग के केंद्रीय सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य सचिव के सचिव स्तर के प्रतिनिधि डीजीपी के आईजी स्तर के नामित सदस्य की कमेटी बनाने का आदेश दिया। कमेटी को सूबे में चल रहे फर्जी शिक्षण संस्थानों के द्वारा दी जा रही डिग्रियों के बारे में जांच कर उसके चेयरमैन के खिलाफ सिविल तथा क्रिमिनल केस करने के बारे में रिपोर्ट देने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने उमेश चंद्र की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की। इसके पूर्व एटीएस के आईजी सुनील कुमार झा तथा स्वास्थ्य विभाग के निदेशक विभाष प्रसाद सिंह की संयुक्त जांच रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि काउंसिल ऑफ पेटेंट मेडिसीन की ओर से बिहार में बीएएमएस डिग्री दे रही है। काउंसिल बिहार सरकार से मान्यता प्राप्त होने तथा न्यायपालिका से उसके पक्ष में फैसला मिलने का दावा करती है। केंद्र सरकार के एडिशनल सालिसिटर जनरल एसडी संजय ने कोर्ट को बताया कि इसकी सत्यता की जांच करने की काफी कोशिश की गई। लेकिन किसी भी विभाग में इसके बारे में कोई सूचना नहीं है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ऐसी किसी भी संस्था के रजिस्टर्ड नहीं होने की जानकारी दी है। इसके बावजूद यह संस्था छात्रों को खुलेआम धड़ल्ले से डिग्री जारी कर रही है। अदालत ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर फर्जी संस्थानों की जांच कर रिपोर्ट 28 नवंबर तक कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि काउंसिल ऑफ पेटेंट मेडिसीन का हेड ऑफिस आरा में अवस्थित है। यह अपने आपको सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था कहती है।

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  • Web Title:Committee constituted to investigate fake educational institutions of the
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