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शिक्षक बन गया में रह रहा था विस्फोट का आरोपी तौसीफ

तौसीफ खां ने सिर्फ अपना नाम नहीं बदला, बल्कि पहचान छुपाने को उसने पढ़ाई का सहारा भी ले रखा था। निजी स्कूल में गणित-विज्ञान का शिक्षक बना तौसीफ, करमौनी में लोगों के बीच अतीक के नाम से जाना जाता था। महाराष्ट्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके इस शख्स को देश की सुरक्षा एजेंसियां तलाश रही थी, लेकिन वह बड़े आराम से 9 साल तक बिहार में बैठा रहा। एक-दो हजार रुपए मिलता था वेतन 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट के बाद तौसीफ खां गिरफ्तारी से बचने के लिए गुजरात छोड़कर बिहार आ गया। उसे जाननेवाले सना खां ने गया के डोभी थाना के करमौनी में उसे जगह दिलाई। वहीं सरवर सलाही के मुमताज पब्लिक हाईस्कूल में उसे शिक्षक की नौकरी भी दिला दी। शुरुआत में एक से दो हजार रुपए उसे वेतन के तौर पर मिलते थे। पुलिस के मुताबिक वह गणित और विज्ञान पढ़ाता था। तीन साल तक उसने वहां शिक्षक के तौर पर काम किया। बाद में नौकरी छोड़ ट्यूशन पढ़ाने लगा। 2001-05 के बीच की इंजीनियरिंग की पढ़ाई एडीजी मुख्यालय एसके सिंघल के मुताबिक तौसीफ खां उर्फ अतीक ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्यूनिकेशन से इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी की है। महाराष्ट्र के नंदूरबाग स्थित डीएन पाटिल इंजीनियरिंग कॉलेज से उसने में बीटेक किया था। राजस्थान और मुंबई भी गया था तौसीफ उर्फ अतीक गया में अपना ठिकाना बनाने के बाद भी राज्य से बाहर आता जाता रहता था। उसके पास से मुंबई का टिकट भी मिला है। बिहार आने के पहले भी वह मुंबई जाता था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर ज्यादा परेशान हैं कि वह राजस्थान क्या करने जाता था। 2016 और 2017 में वह दो बार राजस्थान गया था। सीमावर्ती राज्य होने के चलते वह राजस्थान में दो दफे किससे और क्यों मिलने गया यह जानने की कोशिश हो रही है। मुंबई जाने के कारणों की भी छानबीन की जा रही है। गुजरात एटीएस लेगी रिमांड पर गुजरात एटीएस की टीम तौसीफ को रिमांड पर लेने बिहार आ रही है। अहमदाबाद ब्लास्ट केस में उसे ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात ले जाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक रिमांड के दौरान उसे उन जगहों पर ले जाया जाएगा जहां वह फरारी के दौरान गया था। इनमें राजस्थान और मुंबई के जगह भी शामिल हैं। नौ साल तक नहीं आया गिरफ्त में अहमदाबाद बम ब्लास्ट केस का आरोपी तौसीफ (ए-15, ब्लॉक-सी, यूनाइटेड अपार्टमेंट, जुहापुरा, सरखेज रोड, अहमदाबाद) नौ वर्षों तक फरार रहा। फरारी के दौरान गया में इसकी मौजूदगी की भनक बिहार पुलिस को भी नहीं लगी। साइबर कैफे में उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर लोगों की नजर नहीं पड़ती तो शायद वह पुलिस की गिरफ्त में भी नहीं आता।

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  • Web Title:Ahmadabad boom blast accused Tausif has changed his name
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