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इंटर में शून्य रिजल्ट पर कार्रवाई को कमेटी गठित

इंटरमीडिएट परीक्षा, 2017 में शून्य रिजल्ट लाने वाले 235 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों पर गाज गिरना तय हो गया है। शिक्षा विभाग ने अपने पहले के निर्णय में संशोधन करते हुए ऐसे विद्यालयों के प्रधानाचार्यों तथा जिन जिलों में ये विद्यालय अवस्थित हैं वहां के जिला शिक्षा पदाधिकारियों तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक) को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फैसला लिया है। सेवानिवृत्ति की यह कार्रवाई अगले तीन माह में पूरी हो जाएगी। गौरतलब है कि माध्यमिक-उच्च माध्यमिक शिक्षा में सुधार को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा जारी 7 जुलाई को एक्शन प्लान में इंटर में शून्य रिजल्ट वाले विद्यालयों के शिक्षक व प्रधानाचार्यों को चिह्नित कर तीन माह में उनपर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का भार नियोजन इकाई के सचिव और माध्यमिक निदेशक को दिया गया था। पर अब यह अनुशासनात्मक कार्रवाई न सिर्फ अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदल गई है बल्कि शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी के निर्देश पर विभाग ने सोमवार को स्क्रीनिंग कमेटी भी गठित कर दी। शिक्षा सचिव आरएल चौंगथू इस कमेटी के अध्यक्ष हैं जबकि माध्यमिक निदेशक आरपीएस रंजन तथा निदेशक प्रशासन सुशील कुमार कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं। इस मामले में नयी गतिविधि यह हुई है कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इंटर परीक्षा 2017 में शत प्रतिशत बच्चों के फेल करने वाले विद्यालयों को चिह्नित कर उनपर कार्रवाई का प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भेज दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक ऐसे विद्यालयों की संख्या 235 हैं जहां के सभी बच्चे इंटर की परीक्षा में फेल हैं। ये विद्यालय करीब दर्जनभर जिलों में स्थित हैं। विभाग के रुख को देखते हुए 235 प्रधानाचार्य, दर्जनभर डीईओ और इतने ही डीपीओ को मिलाकर 259 शिक्षक और शिक्षा सेवा के अधिकारियों को अगले तीन माह में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। सरकार की कार्रवाई से ऐसे स्कूलों के शिक्षक भी नहीं बच पाएंगे।

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  • Web Title:Action Committee on Zero Result in Inter-Committee constituted
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