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भटक रही वृद्धा कहती थी...उसका बेटा आकर घर ले जाएगा, आखिर पहुंच ही गया बेटा

 एक सप्ताह से एक घर के छज्जे के नीचे सड़क पर बैठी मिलती थी

1/2 एक सप्ताह से एक घर के छज्जे के नीचे सड़क पर बैठी मिलती थी

दस दिनों से भटक रही वृद्ध महिला कहती थी...उसे घर ले जाने उसका बेटा आएगा, आखिरकार पहुंच ही गया उनका बेटा। भटककर इशाकचक के गुमटी संख्या 12 के पास पहुंची वृद्ध महिला को लेने बुधवार को उनके घरवाले पहुंचे। पिछले दस दिनों से वृद्धा लाइन किनारे के मोहल्ले में पड़ी थी। बुधवार को उसका बेटा, बेटी और दामाद उसे लेने पहुंचे और साथ ले गए।

हाथीदाह के मराची गांव की रहने वाली वृद्धा के बेटे विपिन यादव ने बताया कि उनकी मां दो माह पहले सावन महीने में अपनी बड़ी बेटी रेशमा के घर जाने के लिए चुपचाप ही सामान लेकर निकल गई थी। इसके बाद से वह लापता थी। उस वक्त उनके घर पर केवल विपिन की पत्नी ही घर का देखभाल कर रही थी। जबकि विपिन हर साल की तरह सावन माह में सुल्तानगंज में कांवर बनाने का काम करने के लिए चला आया था।

विपिन ने बताया कि सुल्तानगंज में रहने वाली उसकी बहन कालो देवी और जीजा सूरज यादव ने अखबार में मां की फोटो देख उन्हें सूचना दी। जिसके बाद तीनों अपनी मां को लेने के लिए भागलपुर पहुंच गए। विपिन ने इसके लिए दैनिक अखबार हिन्दुस्तान के प्रति आभार व्यक्त किया।
 

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  • Web Title:Old woman wandering from ten days in bhagalpur, finally met to son
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