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हाटकेश्वर महादेव: यहां पैंट-पायजामा पहनकर नहीं कर सकते पूजा

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इलाहाबाद के शिव मंदिरों में जीरो रोड चौराहे के पास स्थित हाटकेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर अपने आप में बेहद खास है। मंदिर से जुड़ी एक अनूठी परंपरा है कि यहां पुरूष भक्त पैंट या पायजामा पहन कर पूजन नहीं कर सकते। सावन और महाशिवरात्रि के समय मंदिर में पूजन-अर्चन के लिए शहर के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उड़ीसा के भक्त आते हैं। सावन में हर सोमवार को शिवलिंग बहुरंगी पुष्पों से भव्य शृंगार और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

आज भी कायम है परंपरा 
डेढ़ सौ साल पुराने इस दक्षिण भारतीय मंदिर में पूजन-अर्चन से जुड़ी रोचक परंपराएं आज भी कायम हैं। मंदिर में कोई भी पुरुष भक्त पैंट या पायजामा पहनकर पूजा नहीं कर सकते। इसके लिए उसे लूंगी या धोती पहनना जरूरी है। यदि किसी भक्त के पास  वस्त्र मौजूद नहीं रहता है तो मंदिर प्रबंधन की ओर से  पहले धोती-लूंगी उपलब्ध कराई जाती थी लेकिन कुछ व्यवहारिक कारणों से अब मुहैया नहीं कराया जाता। 

पाताल लोक के देवता हैं हाटकेश्वर महादेव
माना जाता है कि मंदिर की  स्थापना गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने लगभग 150 साल पहले कराया था। बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। मान्यता है कि पाताल लोक में हाटकी नदी के समीप एक शिव मंदिर था उसी के नाम से इसका नाम हाटकेश्ववर महादेव पड़ा। ‘हाट’ का अर्थ सोना है। अर्थात पृथ्वी के अंदर मौजूद बहुमूल्य रत्नों के स्वामी हाटकेश्वर महादेव हैं। इनकी पूजन-अर्चन से भक्त को सोने चांदी की कमी नहीं रहती है। 

अन्न का भोग वर्जित
हाटकेश्वर महादेव को भक्त केवल फल का भोग लगाते हैं। अन्न से बने किसी तरह के प्रसाद का भोग लगाना वर्जित है। कहा जाता है कि मंदिर की स्थापना से ही इस परंपरा का पालन किया जाता है। 

अर्घा में स्थापित हैं महादेव
मंदिर के बीच में हाटकेश्वर महादेव चांदी के अर्घा में स्थापित हैं। यह अर्घा पार्वती का स्वरूप माना जाता है। महादेव की पूजा करने से भक्तों को शिव-पार्वती दोनों का आशीर्वाद मिलता है। अर्घा के सामने नंदी भगवान विराजमान हैं। नंदी के बगल गणेश, पार्वती, कार्तिकेय और सूर्य भगवान विराजमान हैं। मंदिर के चारों कोने पर हनुमान जी, दुर्गाजी और लक्ष्मी नारायण की मूर्तियां स्थापित हैं। 

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‘महादेव मंदिर में दक्षिण भारतीय परपंरा के अनुसार पूजन-अर्चन की परंपरा है। रुद्राभिषेक और शृंगार से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। श्रद्धा के साथ महादेव की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकमानाएं पूरी होती हैं।’ 

पं. हरिशचंद्र तिवारी मंदिर पुजारी, हाटकेश्वर महादेव 

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  • Web Title:pants and pyajama is not allowed in haatkeshwar mahadev
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