class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

महाभारतकालीन मंदिर: यहां पांडव करते थे भगवान शिव की आराधना

महाभारतकालीन नगरी हस्तिनापुर ऐसा तीर्थ स्थान है, जो हिंदू, जैन के साथ सिखों का भी पवित्र तीर्थ है। यहां के पांडव वन ब्लॉक में प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। इस मंदिर को पांडेश्वर मंदिर नाम से जाना जाता है। हजारों साल से यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। कहा जाता है कि इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने की थी। 

हस्तिनापुर को चक्रवर्ती सम्राट भरत की भी राजधानी माना जाता है। पहले हस्तिनापुर नगर गंगा तट पर स्थित था, किंतु अब गंगा यहां से कई मील दूर हट गई है। गंगा की पुरानी धारा को बूढ़ी गंगा कहा जाता है। यहां स्थित पांडेश्वर मंदिर का इतिहास पांच हजार साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है।

महाभारतकाल में युधिष्ठिर ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर भोलेबाबा से युद्ध में विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था। पांडवों के पूजा करने से ही इस मंदिर का नाम पांडेश्वर मंदिर पड़ा। जब युधिष्ठर द्रौपदी के साथ यहां भोलेनाथ की पूजा करते थे तो उनके चारों भाई मंदिर के चारों गुंबदों पर भगवान शिव की आराधना करते थे।

यहां से कुछ ही दूरी पर प्राचीन द्रौपदेश्वर मंदिर भी है। माना जाता है कि इस मंदिर में माता द्रौपदी ने शिवलिंग स्थापित किया था। हर साल शिवरात्रि पर और सावन के मौके पर यहां लाखों शिवभक्त आते हैं। कहा जाता है कि भोले बाबा के इस मंदिर से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता है। मंदिर परिसर में सैकड़ों वर्ष पुराना वट वृक्ष और शीतल जल का कुआं मौजूद है।

आस्था : जानें क्या है सावन के दूसरे सोमवार का महत्व, मंदिरों में भक्त

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Pandava do worship Lord Shiva here
धर्म नक्षत्र: पढ़ें ज्योतिष, आस्था और हस्तरेखा से जुड़ी खबरेंज्योतिष: किसी स्त्री का ये अंग फड़कता है तो मिलता है .....