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मनुष्य अपने गुणों से आगे बढ़ता है न कि दूसरों की कृपा से

बात लाला लाजपत राय के बचपन के दिनों की है। उनके स्कूल के छात्रों ने पिकनिक पर जाने का प्रोग्राम बनाया और तय किया कि प्रत्येक छात्र घर से कुछ न कुछ खाने का सामान लाएगा। उन्होंने अपनी मां को पिकनिक के बारे में बताया। 

घर में कुछ खजूर थे लेकिन पैसे नहीं थे। पिता को जब उनकी मां ने पिकनिक के बारे में बताया तो पिता की जेब भी खाली थी। तब पिता ने पड़ोस से कुछ पैसे उधार लाकर बालक की इच्छा पूरी करने का निश्चय किया। वह पड़ोसी के पास जाने को हुए तो बालक ने उन्हें रोक लिया और कहा कि पिताजी, उधार मांगना उचित नहीं है। कर्ज मांगकर पिकनिक पर जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। ऐसे थे महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपतराय। जो पंजाब केसरी नाम से सुविख्यात हुए। उनका कहना था कि मनुष्य अपने गुणों से आगे बढ़ता है न कि दूसरों की कृपा से।

बचपन से ही था सेवाभाव 
एक बार उनके माता-पिता दोनों अस्वस्थ हो गए। बालक लाला घर के सारे कार्य खुद करने लगे। भाई-बहनों को संभालना, घर का सारा काम और माता पिता की सेवा वह खुद ही करते। कई दिन बाद जब माता-पिता का स्वास्थ्य अच्छा हुआ तो पिता ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि बड़े होकर तुम सभी जरूरतमंद लोगों की ऐसे ही सेवा करोगे। 

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  • Web Title:Man goes ahead with his qualities
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