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सावन 2017: तीनों लोकों में प्रतिष्ठित हैं महाकाल, इस बार मिलेगी विशेष कृपा

mahakaleshwar

परमेश्वर श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिग के ‘दर्शनाभिषेक’ के लिए पवित्र श्रवण माह आरम्भ हो चुका है। वर्षो बाद श्रवण माह सम्पुट सोमवारों वाला है यानी जिसके आरम्भ में भी सोमवार और समापन में भी सोमवार ही है। इसलिए प्राणियों के लिए श्रीमहाकालेश्वर का स्तवन कर उनकी कृपा प्राप्ति का ये संयोग दिव्य है, जो दैहिक, दैविक और भौतिक महादुखों से मुक्ति दिलाने वाला है।

वर्तमान श्रीश्वेतवाराह कल्प में श्रीमहाकाल तीनों लोकों में त्रयज्योतिर्लिग के रूप में विद्यमान हैं। ‘आकाशे तारकं लिंगं, पाताले हाटकेश्वरम्। भूलोके च महाकालं लिंगत्रय नमोस्तुते।’ अर्थात देवताओं की आराधना के लिए आकाश में तारक ज्योतिर्लिग, महादैत्यों की आराधना के लिए पाताल में हाटकेश्वर तथा भूलोक वासियों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए उज्जयिनी में श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिग के रूप में विद्यमान हैं। शिवपुराण के अनुसार श्रीमहाकाल की परमशक्ति मां श्रीमहाकाली हैं, जिनका महाविद्याओं में सर्वोच्च स्थान है, सृष्टि संहार में ये ही महाकाल की सहायक रहती हैं। महाकाल सूक्ष्मतमकाल के भी नियंत्रक हैं। जीवन में काल की महत्ता सर्वोपरि है। जिस प्राणी ने काल को साध लिया, काल उसका सहायक हो गया और जिसने काल का तिरस्कार किया, वह महाकाल की ज्वाला में भस्म हो गया।

 

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श्रीमहाकालेश्वर मृत्युलोक के अधिपति हैं। तांत्रिक परम्परा में प्रसिद्ध दक्षिणमुखी पूजा का महत्व बारह ज्योतिर्लिगों में केवल श्रीमहाकालेश्वर को ही प्राप्त है, इसीलिए यहां वाममार्गी और दक्षिण मार्गी दोनों प्रकार के भक्तों की भारी भीड़ रहती है। इनके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है और स्वप्न में भी किसी प्रकार का संकट नहीं आ सकता। इनके विषय में पुराणों में कहा गया है,‘भूलोक पर जो महाकालेश्वर नाम से शिव हैं, उनकी पूजा-आराधना से स्वप्न में भी दु:ख प्रवेश नहीं कर सकता, उनकी पूजा-आराधना से भक्तों की प्रतीक्षित सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।’

अवंतिका पुरी (उज्जैन) में इनका प्राकट्य अपने ‘रुद्राभिषेकीब्राह्मण’ भक्तों की ‘दूषण’ नामक महादैत्य से रक्षा के लिए हुआ। उन्हीं ब्राह्मणों की स्तुति से प्रसन्न होकर काल ने दैत्य सेना का हुंकार मात्र से संहार कर दिया और भक्तों के दुख दूर करने के लिए यही महाकाल के रूप में प्रतिष्ठित हुए। इनका अमोघमंत्र ऊं नम: शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ऊं नम: शिवाय’ का प्रात:काल जप करके प्राणी यात्र पर जाए, तो कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते हैं और प्राणी सकुशल घर वापस आता है।

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  • Web Title:lord shiva is being worshiped in universe
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