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कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते है कालाष्टमी

लाइव हिन्दुस्तान टीम  First Published:19-04-2017 03:11:15 AMLast Updated:19-04-2017 02:40:35 PM
कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते है कालाष्टमी

हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। कालभैरव के भक्तजन कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्माजी के पांच मुख थे। एक दिन पंचमुखी ब्रह्माजी के एक मुख ने देवाधिदेव भगवान शिव की निंदा की तो भगवान शिव के अंश काल भैरव क्रोधित हो उठे और उन्होंने ब्रह्माजी का मुख अपने नाखून से काट दिया। काल भैरव को ब्रह्म हत्या का दोष लगा तब जगतपालक भगवान विष्णु ने काल भैरव को काशी भेजा। कहते हैं, यहां पहुंचकर काल भैरव को ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली और वह यहीं स्थापित हो गए।

कालभैरव को साक्षात भगवान शिव का दूसरा रूप माना जाता है। कालभैरव की पूजा से घर में काली शक्तियों का वास नहीं होता। इनकी पूजा से घर में नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता। काल भैरव के दर्शन मात्र से शनि की साढ़े साती, अढ़ैया और शनि दंड से बचा जा सकता है।

काशी में भगवान भोलेनाथ के पश्चात यदि किसी का महत्व है, तो वो हैं काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव। कहा जाता है कि बाबा काल भैरव की अनुमति लेकर ही काशी विश्वनाथ में रहा जा सकता है। इसलिए उनको काशी का कोतवाल कहा जाता है। काशी में बाबा काल भैरव के दर्शन किए बिना काशी विश्वनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। भगवान विश्वनाथ महादेव काशी के राजा हैं और काल भैरव इस शहर के कोतवाल।

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Web Title: so settled in kashi kal bhairav
 
 
 
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