Image Loading so settled in kashi kal bhairav - Hindustan
मंगलवार, 24 अक्टूबर, 2017 | 04:56 | IST
खोजें
ब्रेकिंग
  • स्पोर्ट्स स्टार: IPL 10 में कैप के लिए बल्लेबाजों में रोचक जंग, भुवी पर्पल कैप की दौड़...
  • बॉलीवुड मसाला: 'बाहुबली 2' की कमाई तो पढ़ ली, अब जानें स्टार्स की सैलरी। यहां पढ़ें,...
  • IPL 10 #DDvSRH: जीत के ट्रैक पर लौटी दिल्ली डेयरडेविल्स, हैदराबाद को 6 विकेट से हराया
  • IPL 10 #DDvSRH: 5 ओवर के बाद दिल्ली का स्कोर 46/1, लाइव कमेंट्री और स्कोरकार्ड के लिए यहां...
  • IPL 10 #DDvSRH: हैदराबाद ने दिल्ली को दिया 186 रनों का टारगेट, युवराज ने जड़ी फिफ्टी
  • IPL 10 #DDvSRH: 16 ओवर के बाद हैदराबाद का स्कोर 126/3, लाइव कमेंट्री और स्कोरकार्ड के लिए यहां...
  • IPL 10 #DDvSRH: 10 ओवर के बाद हैदराबाद का स्कोर 83/2, लाइव कमेंट्री और स्कोरकार्ड के लिए यहां...
  • Funny Reaction: प्रियंका की ड्रेस पर हुई 'दंगल की कुश्ती', लोगों ने यूं लिए मजे, पढ़ें...
  • स्टेट न्यूज़ : पढ़िए, राज्यों से अब तक की 10 बड़ी ख़बरें
  • स्पोर्ट्स स्टार: रोहित शर्मा का कमाल, आईपीएल में ऐसा करने वाले बने चौथे...
  • बॉलीवुड मसाला: 'भल्लाल देव' का खुलासा- इसलिए बताई एक आंख से ना देख पाने की बात।...
  • टॉप 10 न्यूजः पढ़ें सुबह 9 बजे तक देश-दुनिया की बड़ी खबरें एक नजर में
  • हेल्थ टिप्सः आसपास सोने वालों की नहीं होगी नींद खराब, ऐसे लगेगी खर्राटों पर लगाम
  • हिन्दुस्तान ओपिनियनः पढ़ें वरिष्ठ तमिल पत्रकार एस श्रीनिवासन का लेख- तमिल...
  • मौसम दिनभरः दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, पटना में रहेगी तेज धूप। देहरादून और रांची में...

कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते है कालाष्टमी

लाइव हिन्दुस्तान टीम  First Published:19-04-2017 03:11:15 AMLast Updated:19-04-2017 02:40:35 PM
कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते है कालाष्टमी

हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। कालभैरव के भक्तजन कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्माजी के पांच मुख थे। एक दिन पंचमुखी ब्रह्माजी के एक मुख ने देवाधिदेव भगवान शिव की निंदा की तो भगवान शिव के अंश काल भैरव क्रोधित हो उठे और उन्होंने ब्रह्माजी का मुख अपने नाखून से काट दिया। काल भैरव को ब्रह्म हत्या का दोष लगा तब जगतपालक भगवान विष्णु ने काल भैरव को काशी भेजा। कहते हैं, यहां पहुंचकर काल भैरव को ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली और वह यहीं स्थापित हो गए।

कालभैरव को साक्षात भगवान शिव का दूसरा रूप माना जाता है। कालभैरव की पूजा से घर में काली शक्तियों का वास नहीं होता। इनकी पूजा से घर में नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता। काल भैरव के दर्शन मात्र से शनि की साढ़े साती, अढ़ैया और शनि दंड से बचा जा सकता है।

काशी में भगवान भोलेनाथ के पश्चात यदि किसी का महत्व है, तो वो हैं काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव। कहा जाता है कि बाबा काल भैरव की अनुमति लेकर ही काशी विश्वनाथ में रहा जा सकता है। इसलिए उनको काशी का कोतवाल कहा जाता है। काशी में बाबा काल भैरव के दर्शन किए बिना काशी विश्वनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। भगवान विश्वनाथ महादेव काशी के राजा हैं और काल भैरव इस शहर के कोतवाल।

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title: so settled in kashi kal bhairav
 
 
 
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड