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अपनी बेचैनी को ऐसे करें कम

सवाल: मैं छोटी-छोटी बातों पर बेचैन हो जाती हूं। बहुत ज्यादा चिंता करती हूं। कैसे होगा, सही होगा या गलत, कहीं कुछ गलत ना हो जाए, बच्चों के नंबर कैसे आएंगे आदि-आदि। कई बार बेचैनी के कारण रात में नींद भी नहीं आती। डॉक्टर का कहना है कि मुझे संभलने की जरूरत है।

कविता शर्मा, देहरादून

जवाब: बेचैनी हर किसी को होती है, पर यह हर समय अच्छी नहीं होती। जब यह घबराहट या व्याकुलता आपकी जीवनचर्या का हिस्सा बन जाये, कल क्या होगा, कैसे होगा, कहीं कुछ बुरा तो नहीं होने वाला है जैसी छोटी-छोटी बातें आपको हर वक्त परेशान करने लगें तो इसका मतलब यह है कि आप एंग्जाइटी डिसॉर्डर या व्याकुलता के विकार से पीड़ित हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति भावनात्मक रूप से असुरक्षित महसूस करता है। हर समय थका हुआ महसूस करता है। मांसपेशियों में खिंचाव रहता है। अगर व्याकुलता लगातार  छह महीने से अधिक रहे तो इसे एंग्जाइटी डिसॉर्डर कहा जाता है, जो मानसिक रोग का भी कारण बन सकती है। अगर समय पर इसका निदान न हो तो व्यक्ति अवसाद का शिकार भी हो सकता है। कई लोगों को नींद में बुरे सपने आना, सांस लेने में दिक्कत होना, घबराहट होना, हर समय असहज रहना, हाथों में पसीना आना, तलवों का ठंडा पड़ना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।   अगर लग रहा है कि इस बेचैनी के कारण आपकी दिनचर्या पर असर पड़ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस बीच अपने खान-पान का ध्यान रखें। संतुलित भोजन करें। नियमित व्यायाम करें। ध्यान से भी लाभ होगा। सही सोच रखने वालों के साथ रहें। अच्छी किताबें पढ़ें। 

विशेषज्ञ: डॉ. नितिन शुक्ला, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, विमहंस हॉस्पिटल

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  • Web Title:How to manage your anxiety