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पाक गृहमंत्री रहमान मलिक ने कहा कि बिना सबूतों के सईद के खिलाफ कार्रवाई मुमकिन नहीं है।
पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक का कहना है कि मुंबई हमलों के मुख्य अभियुक्त, प्रतिबंधित जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ कही-सुनी बातों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती और भारत द्वारा मुहैया कराई गए सूचना के मूल्यांकन के लिए और वक्त की जरूरत है।
एक साक्षात्कार में मलिक ने कहा कि सईद के बारे में भारत ने हमें महज दस दिन पहले नवीनतम साक्ष्य दिए हैं। इनके परीक्षण के लिए हमें कुछ और दिन चाहिए। हम सिर्फ कही-सुनी बातों के आधार पर कुछ नहीं कर सकते।
बहरहाल, यहां तैनात भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों का कहना है कि भारत ने पाकिस्तान को पिछली 21 अगस्त को नया प्रमाण दस्तावेज सौंपा था। उसके बाद से अब तक भारत ने कोई भी सूचना मुहैया नहीं कराई है।
पाकिस्तान सरकार द्वारा सईद के मामले को लापरवाही से लेने के भारत के आरोप के बारे में पूछे जाने पर मलिक ने कहा हम आपकी अदालतों का सम्मान करते हैं, आप भी हमारी अदालतों का सम्मान कीजिये।
मलिक ने भारत पर मुम्बई हमलों की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा आरोप लगाने का खेल बंद करके सही रवैया अपनाया जाना चाहिए।
मलिक ने कहा कि पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के बारे में सूचना नौ फरवरी को मांगी थी जबकि उसने हमें 20 जून को जवाब दिया। वह भी मराठी भाषा में। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना पक्षपातपूर्ण और अधूरी थी।
मलिक ने कहा कि भारत ने साल 2007 में समझौता एक्सप्रेस पर हुए हमले के बारे में सूचना को साझा करने से मना करने के अलावा और भी कई खामियां बरती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के भी करीबी हमारे एक मित्र देश ने हमें बताया था कि मुंबई हमलों में शामिल एक आतंकवादी समझौता एक्सप्रेस कांड में भी लिप्त था।
पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों द्वारा भारत पर एक और हमला करने की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आशंका के बारे में पूछे जने पर मलिक ने कहा अगर भारत ने इस सिलसिले में हमारे साथ कोई भी खुफिया सूचना बांटता है तो हम 72 घंटे के अंदर नतीजे के साथ हाजिर होंगे।
उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में परेशानी पैदा करने में भारत की संलिप्तता के पर्याप्त सुबूत हैं।
मलिक ने दावा किया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऐसे 22 शिक्षकों को पकड़ा है जिन्हें अफगानिस्तान में प्रशिक्षित किया गया था और वे बच्चों के जेहन में पाकिस्तान विरोधी भावनाएं भरने के लिए स्वदेश लौट रहे थे।

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