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  Image Loading अन्य फोटो एचटी लीडरशिप समिट के मुख्य अतिथि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश नई दिल्ली पहुंच गए हैं।
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बहुलवादी भारत विश्व मंच पर एक मिसालः बुश
हिन्दुस्तान टीम, एक्सक्लूसिव
First Published:30-10-09 02:24 PM
Last Updated:31-10-09 10:56 AM
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एचटी लीडरशिप समिट के मुख्य अतिथि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश नई दिल्ली पहुंच गए हैं। इस मौके पर उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंधों सहित विश्व के कई अहम मसले पर अपने विचार व्यक्त किए। पेश है उनके साथ वार्ता के प्रमुख अंश-

प्रश्न- आजकल आप अपने आपको व्यस्त रखने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर- अधिकांश समय विभिन्न मौको पर व्याख्यान देने में बितता है, वैसे मैं एक किताब पर भी काम कर रहा हूं। इस किताब के जरिए मैं लोगों को यह बताना चाहता हूं कि राष्ट्रपति रहते मैंने जो निर्णय लिए वे किस परिस्थितियों में लिए। आप जानते हैं कि उनमें से कुछ निर्णय बहुत ही अहम व प्रभावोत्पादक थे। मैं बस चाहता हूं कि लोग जाने। यह किताब इतिहासपरक होगी, जिसमें मैं यह बताने की कोशिश करूंगा कि किन परिस्थितियों में मैंने वे निर्णय लिए ताकि लोग ये समझ सकें कि अगर मेरी जगह वे होते तो क्या करते। इस किताब में मेरी जीवनी के अंश भी हैं, लेकिन यह मुख्य रूप में से मेरे राष्ट्रपतित्व काल पर आधारित है। संभवतः यह किताब अगले साल तक बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।

प्रश्न- भारत आपकी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा रहा। क्या यह शुरुआत से ही आपके वैश्विक सोच का हिस्सा था?
उत्तर- मैंने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान रोनाल्ड रीगन लाइब्रेरी पर एक भाषण दिया था, जहां मैंने आर्थिक और राजनीतिक रूप से उभरते भारत के बारे में बात कही थी। मैंने उसी वक्त यह साफ कर दिया था कि भारत के साथ अच्छे संबंध अमेरिकी हितों के लिए बेहतर होगा। दूसरे शब्दों में भारत का महत्व मेरे दिमाग में राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ही था। जब आप भारत के बारे में सोचते हैं तो एक बहुलवादी समाज है, जहां धर्म को लेकर सहिष्णुता है, यह एक लोकतंत्र है। भारत को आतंक के खिलाफ लड़ना होगा और भारत के लोग इसमें सक्षम हैं। अमेरिका में भी कई भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जहां से मुझे प्रेरणा मिली की दोनों देशों के संबंधों में बदलाव होना चाहिए। मैंने भूतकाल में हुई घटनाओं को दरकिनार करते हुए तथा भविष्य को सुनहरा बनाने के लिए भारत के दो प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार के लिए श्रेय वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जाता है, जिनकी मैं बहुत इज्जत करता हूं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी मेरे लिए बहुत सम्माननीय हैं। वह भी संबंधों को बेहतर बनाने के प्रति बहुत गंभीर थे।

प्रश्न- क्या भविष्य के अमेरिकी राष्ट्रपतियों के काल में भी भारत के साथ अच्छे संबंध का सिलसिला जारी रहेगा?
उत्तर- बिल्कुल, वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत रहेंगे, जैसा कि उन्होंने अपने बयान में कहा है। और मुझे लगता है कि भविष्य के दूसरे राष्ट्रपति भी भारत के महत्व को एक वैश्विक साझेदार के रूप में समझेंगे। अभी आर्थिक रूप से जो परिवर्तन हो रहे हैं वह महत्वपूर्ण है। वैश्विक मंदी से निपटने के लिए वैश्विक प्रयास जरूरी है। आप जानते हैं कि मैंने जी-8 के स्वरूप को बदलकर जी-20 किया ताकि भारत को एक मंच पर लाया जाए। विश्व की बेहतरी के लिए तथा मंदी से निपटने के लिए भारत के वगैर ठोस बातचीत संभव नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था भविष्य के विश्व के लिए बेहद अहम है। मुझे लगता है कि भविष्य में इतिहासकर जब इस काल को देखेंगे तो वह पाएंगे कि इस मंदी से विश्व शायद इसलिए निकल पाया कि भारत जैसी अर्थव्यवस्था अभी भी विकास कर रही है और विश्व को मंदी के दौर से बाहर निकाल रही है। 20 साल पहले यह बात नहीं कही जा सकती थी।

प्रश्न- आर्थिक रूप से अमेरिका के लिए भारत कितना अहम है?
उत्तर- अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा संरक्षणवाद है। लोग सोचते हैं कि सही आर्थिक मॉडल अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए दीवारें खड़ी करना है। मेरे नजरिए से इस प्रकार की नीति से आर्थिक ठहराव आएगा और बेरोजगारी दर में वृद्धि होगी। मैं अपने देशवासियों को यह याद दिलाना चाहता हूं कि अमेरिका के भविष्य के लिए भारत बेहद अहम होगा। भारत में मध्यमवर्ग की संख्या अमेरिकी जनसंख्या से भी अधिक है। इसलिए अगर हमारे पास अच्छे उत्पाद हैं और अगर हम प्रतियोगिता में टिक सकते हैं तो भारत में हमें अच्छी प्रगित हासिल करने का मौका है और इससे अमेरिका में भी रोजगार सृजन होगा। भारत अमेरिका के लिए उद्यम व ज्ञान का एक बड़ा स्रोत है। भारतीय विद्यार्थी अमेरिका पढ़ाई करने आते हैं। जिनमें से कुछ अमेरिका में ही रह जाते हैं और वह अमेरिका की आर्थिक संवृद्धि के लिए अहम योगदान देते हैं। एक नीति के तहत प्रवास कानून के तहत अधिक वीजा मुहैया कराने की नीति अपनाई जानी चाहिए। अगर मैं एक भारतीय नेता होता तो मैं अपने पढ़े--लिखे भाई व बहनों को वापस भारत लाने को लेकर परेशान रहता। मैं चाहता कि वो सभी अपने देश आ जाएं। मेरे हिसाब से दोनों ही देश इन शिक्षित जनसंख्या से लाभान्वित हो सकते हैं।

प्रश्न- एटमी डील को आपने भारत-अमेरिकी संबंध का हिस्सा कैसे बनाया?
उत्तर- मेरे विचार में एटमी डील हमें भूतकाल के बंधनों से मुक्त करता है। परमाणु करार यह बताता है कि हम भारत को अलग नजरिए से देखते हैं। साथ ही मैं समझता हूं कि परमाणु ऊर्जा अमेरिका समेत कई देशों के विकास का आधार होगा। मैं आशा करता हूं कि अमेरिका में भी परमाणु से पैदा होने वाली ऊर्जा अधिक होगी। मैं समझता हूं यह करार भारत को अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ने में मदद करेगा। पर्यावरण के बारे में बहुत सारी बातचीत होती है, लेकिन मैं समझता हूं कि अगर कोई सच्चा पर्यावरण का साथी है तो मेरे हिसाब से परमाणु ऊर्जा एक अच्छा विकल्प है।

प्रश्न- पाकिस्तान के साथ संबंधों को आपने किस तरह से चलाया?
उत्तर- सबसे पहला परिवर्तन अमेरिकी नीति में यह आया कि भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ एक ही समय में अच्छे संबंध हो सकते हैं और मेरे लिहाज से दुनिया के इस हिस्से के लिए यही सही होगा। हम सभी चाहते हैं कि पाकिस्तान अपनी सीमा के अंदर आतंकवादियों से लड़े, इसके लिए मेरा मानना है कि हमें अफगानिस्तान को एक लोकतांत्रिक देश बनने में मदद करनी चाहिए और पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना चाहिए। पाकिस्तान को अब यह समझ में आ गया है कि ये आतंकवादी उनके देश में भी हमले कर सकते हैं और तबाह कर सकते हैं।

प्रश्न- भारत व अमेरिका के बीच तकनीकि सहयोग को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर- कई तरीके से तकनीक एक ताकत है। तकनीकि विकास के लिए पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है। लेकिन तकनीकी परिवर्तन लोगों की सृजनात्मकता पर आधारित है। भारत की एक बड़ी ताकत उसका ज्ञान है। मुझे लगता है कि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध हैं। दोनों देशों की कई ऐसी कंपनियां हैं जो एक दूसरे के देश में निवेश को लेकर उत्साहित हैं।

प्रश्नः आपकी नजर में भारत की वैश्विक भूमिका क्या है?
उत्तरः सबसे पहले मैं समझता हूं कि हमलोग तार्किक संघर्ष के दौर में हैं, जहां लोग निर्दोष लोगों को सिर्फ अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए मार देते हैं। भारत इसमें अपनी अहम भूमिका निभा सकता है क्योंकि भारत के पास एक बड़ी मुस्लिम आबादी है, जो दूसरे धर्मों के लोगों के साथ सहिष्णुतापूर्वक रहते हैं। भारत एक बहुत बड़ा उदाहरण है जो हमें सिखाता है कि कैसे कई सारे धर्मों के लोग शांतिपूर्वक एक साथ रह सकते हैं। इसलिए वैश्विक मंच पर भारत की मौजूदगी उन लोगों के लिए एक अच्छा संकेत होगा जो यह सोचकर आश्चर्य करते हैं कि एक बहुल समाज शांतिपूर्वक कैसे रह सकता है। मेरे लिए वास्तव में भारत की मौजूदगी बहुत अहम होगा। मैं जब भारत के प्रधानमंत्री से मिलूंगा तो हम भारत के हितों पर बातचीत के साथ दोनों देशों के साझा आदर्शों पर भी बातचीत होगी। आपके पहले सवाल पर जाते हुए मैं कहना चाहूंगा कि भारत-अमेरिका संबंध प्राकृतिक इसलिए है क्योंकि दोनों देश एक आदर्शों को मानते हैं। स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र विचार, किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता। और यही कुछ मूलभूत सिद्धांत हैं जो कि एक शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में सहायक होगा।

प्रश्न- कुछ लोगों का मानना है कि आप भारत के लिए अमेरिका के सबसे अच्छे राष्ट्रपति थे?
उत्तरः धन्यवाद। मैं नहीं जानता। इतिहास को सच होने में वक्त लगता है। ध्यान देने की बात यह है कि जब मैं राष्ट्रपति बना तो दोनों देशों के अच्छे संबंध का आधार बन गया था। अमेरिका उस वक्त भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार था। मुझे लगता है कि भारतीय भी यही सोचते हैं। मुझे लगता है कि भारतीय व अमेरिकी एक साथ काम करके ही विश्व को और भी बेहतर बना पाएंगे। यह देश बहुत ही बेहतरीन है और मैं यहां वापस आकर अच्छा महसूस कर रहा हूं।

 
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