यूसुफ पठान को टी20 टैग हटने की उम्मीद
प्रकाश एटीपी चैलेंजर एकल से बाहर
आज भी याद आते है विजय के वह पल लीवरपूल को खरीदने की होड़ में अंबानी और सुब्रत राय
नक्सली हिंसा छोड़ें तो किसी भी मुद्दे पर वार्ता संभव:चिदम्बरम टीम इंडिया को खली भरोसेमंद राहुल द्रविड़ की कमी बारिश हो या गर्मी, छतरी के बिना मजा नहीं आता शनि के चांद पर जीवन की सम्भावना गडकरी की औपचारिकता पूरी, जताई जीत की उम्मीद भारत हार के कगार पर, तेंदुलकर का 46वां शतक
अन्य फोटो
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने श्रम और बीमा विधेयकों सहित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए व्यापक आम सहमति बनाने की अपील की।
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने श्रम और बीमा विधेयकों सहित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए शुक्रवार को व्यापक आम सहमति बनाने की अपील की, ताकि अर्थव्यवस्था को नौ प्रतिशत की विकास दर के रास्ते पर लाने के लिए सुधारों को आगे बढ़ाया जा सके।
मुखर्जी ने हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में कहा कि इन विधेयकों को पारित करने के लिए हमारे पास संसद के दोनों सदनों में आवश्यक बहुमत नहीं है, इसलिए व्यापक राजनीतिक आम सहमति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित कर 2011-12 तक 5.5 प्रतिशत पर लाया जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने राजकोषीय सुदढीकरण पर जोर देते हुए कहा कि राजकोषीय घाटे को उचित सीमाओं में रखने का लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह अगले दो साल में आर्थिक विकास दर नौ प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इसकी पूरी उम्मीद है। मुखर्जी ने कहा कि सुधारों को लेकर सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों में ही सहमति कायम करने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी के मद्देनजर सरकार ने सोचा कि मांग पैदा करने के लिए विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में मांग सृजन के लिए संसाधन जुटाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विकास संबंधी व्यय को 2,85,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,25,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। रोजगार गारंटी स्कीम, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों में उच्च आवंटन किया गया है। मुखर्जी ने कहा कि विकास समावेशी होना चाहिए और उसके लिए हम संस्थागत व्यवस्था करने जा रहे हैं। कभी कानूनी अधिकारों के समर्थन से तो कभी सामान्य सरकारी आदेश के जरिए इस काम को अंजाम दिया जाएगा।
सरकार के मितव्ययिता अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि मितव्ययिता की जरूरत है, यह केवल सांकेतिक नहीं है। हिन्दुस्तान लीडरशीप समिट में वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि जीएसटी लागू होने में विलंब हो सकता है।
स्पेक्ट्रम आवंटन के मसले पर दूरसंचार मंत्री ए राजा को लेकर चल रहे विवाद के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों का यह मतलब नहीं है कि भ्रष्टाचार साबित हो गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के मौके पर मुखर्जी ने हालांकि दूरसंचार मंत्री को इस मसले पर क्लीन चिट देने के सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो सीधे केन्द्रीय सतर्कता आयोग के निर्देश पर काम करेगा। मैं यह नहीं कहता कि भ्रष्टाचार नहीं है या कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

ई-मेल

लिखे (0)






