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महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चल रहा प्रचार रविवार को बंद हो जाएगा।
महाराष्ट्र, हरियाणा और अरूणाचल प्रदेश में 13 अक्तूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार रविवार को समाप्त हो जायेगा। इन चुनावों को लोकसभा चुनाव के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए लोकप्रियता का पहला टेस्ट माना जा रहा है।
करीब एक महीने तक चले प्रचार अभियान में कांग्रेस और भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने बढ़-चढ कर हिस्सा लिया। चुनाव के दौरान कहीं कहीं व्यक्तिगत आरोप प्रत्योरोप भी किये गये।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी महासचिव राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इन तीनों राज्यों में प्रचार अभियान में हिस्सा लिया, जहां कांग्रेस सत्ता अपने पास बनाये रखने के लिए जी जान से जुटी है।
उधर लोकसभा चुनाव में पराजय का सामना करने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली और एम वैंकैया नायडू ने प्रचार में हिस्सा लिया और संप्रग सरकार की नीतियों की आलोचना के बहाने कांग्रेस को घेरने का प्रयास किया।
यद्यपि चुनाव प्रचार आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा लेकिन पिछले दिनों नक्सलियों द्वारा महाराष्ट्र में बड़ा हमला कर 17 पुलिसकर्मियों की हत्या किये जाने की घटना ने चुनाव आयोग को शांतिपूर्ण ढंग से मतदान सुनिश्चित करने के लिए सचेत कर दिया है।
महाराष्ट्र में सात करोड़ 56 लाख मतदाता 288 विधायकों का चुनाव करेंगे जबकि हरियाणा में एक करोड़ बीस लाख से ज्यादा मतदाता विधानसभा के 90 सदस्यों का और अरूणाचल में सात लाख 50 हजार मतदाता 60 विधायकों को चुनने के लिए 13 अक्तूबर को मतदान करेंगे । इन तीनों राज्यों में मतगणना 22 अक्तूबर को होगी ।
हरियाणा में विकास के मुददे पर कांग्रेस दूसरी बार सत्ता पर कब्जा जमाने का प्रयास कर रही है । लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली सफलता से उत्साहित राज्य के मुख्यमंत्री भुपेन्द्र सिंह हुडा ने निर्धारित समय से कुछ समय पहले ही विधान सभा भंग करने की सिफारिश कर नया चुनाव कराने का निर्णय किया।
महाराष्ट्र में कांग्रेस शरद पावर के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। एनसीपी लोकसभा चुनाव में बहुत ज्यादा सफलता हासिल नहीं कर पायी थी। विधानसभा चुनाव में वह अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के लिए जुटी है।

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