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समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करने में सही फैसले तक पहुंचने में केंद्र, उच्चतम न्यायालय को मदद देगा।
केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने रविवार को कहा कि समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करने में सही फैसले तक पहुंचने में केंद्र, उच्चतम न्यायालय को मदद देगा और इस मामले में केंद्रीय मंत्रिमंडल से कोई अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
मोइली ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इस संबंध में (समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करने) दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से पहले ही निर्णय किया जा चुका है। केवल उच्चतम न्यायालय में दायर कुछ लंबित अपीलों का प्रश्न है जिसमें हम (सरकार) पक्ष नहीं हैं। इसमें याचिकाकर्ता और प्रतिवादी ही पक्ष है। इस प्रश्न पर हमारे विधि अधिकारी विचार विमर्श करेंगे।
दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में केंद्र की ओर से चुनौती देने के संबंध में कैबिनेट के अपेक्षित निर्णय के संबंध में पूछे जाने पर मोइली ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आपको कैबिनेट से किसी प्रकार के निर्णय की अपेक्षा करनी चाहिए। सही निर्णय लेने में हम केवल न्यायालय को मदद कर सकते हैं।

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