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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर महिलाओं के लिए विशेष तौर पर ‘साक्षर भारत’ मिशन का शुभारंभ किया
देश की सभी महिलाओं को अगले पांच सालों में साक्षर बनाने के लक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर महिलाओं के लिए विशेष तौर पर ‘साक्षर भारत’ मिशन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि ‘साक्षर भारत’ मिशन, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन से भी ज्यादा सफल साबित होगा।
उन्होंने कहा कि देश की एक तिहाई आबादी निरक्षर है। देश की आधी महिलाएं अभी भी पढ़-लिख नहीं सकतीं। साक्षरता के मामले में हम विश्व में सबसे पिछड़े देशों में शुमार हैं। मौजूदा स्थिति से हम संतुष्ट नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्संख्यक और अन्य वंचित व पिछड़े वर्गो की महिलाओं का साक्षर न होना हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती है और हमें इस चुनौती से पार पाना होगा। यदि हमें सभी नागरिकों को सशक्त करना है और तेजी से विकास करना है तो देश को पूरी तरह से साक्षर करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस ‘साक्षर भारत’ मिशन की आज हम शुरुआत कर रहे हैं वह साक्षरता के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को जहिर करता है। यह मिशन खासकर महिलाओं में साक्षरता की दर बढ़ाने की हमारी कोशिश में मददगार साबित होगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को आगे बढ़ाएगी ताकि अगले पांच वर्षो में हर महिला साक्षर हो सके। आज हमने इस दिशा में पहला कदम बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने कई सारी कल्याणकारी योजनाएं आरंभ की हैं। साक्षरता इन सभी योजनाओं की सफलता की कुंजी है और सामाजिक विकास में महिला साक्षरता बेहद जरूरी है। रोजाना संघर्ष करने वाली देश की महिलाओं को सशक्त करने के लिए महिला साक्षरता आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि साक्षरता के मामले में आजादी के बाद से हमने लगातार वृद्धि की है। वर्ष 1950 में साक्षरता की दर 18 फीसदी थी जो वर्ष 1991 में 52 फीसदी और वर्ष 2001 में 65 फीसदी पहुंच गयी।

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