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केंद्रीय मंत्रिमंडल से फटकार मिलने के एक दिन बाद तेल मंत्री मुरली देवड़ा ने शुक्रवार को ईंधन के खुदरा विक्रेताओं और चीनी मिलों की एक बैठक बुलाई है ताकि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचने के कार्यक्रम का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
देवड़ा ने संवाददाताओं से कहा कि इस साल की 68 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत के मुकाबले तेल विपणन कंपनियों की निविदा को सिर्फ 40 प्रतिशत के लिए बोली प्राप्त हुई।
सरकार ने 2006 में पेट्रोल में पांच प्रतिशत की दर से इथेनॉल मिलाना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद सरकार ने कहा था कि पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का अनुपात अक्टूबर 2007 से ऐच्छिक तौर पर बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया था और अक्टूबर 2008 से इसे अनवार्य बनाने की घोषणा की थी।
लेकिन तेल विपणन कंपनियों : इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम इथेनॉल की कमी के कारण पांच प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की अनिवार्यता लागू नहीं हो पाई थी। देवड़ा ने आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) से अनुरोध किया था कि इथेनॉल मिलाने की अनिवार्यता को फिलहाल टाल दिया जाए।
सीसीईए ने गुरुवार को हालांकि देवड़ा के मंत्रालय को पांच प्रतिशत मिलाने का कार्यक्रम लागू न करने के लिए फटकार लगाई और निर्देश दिया कि इस कार्यक्रम को पूरी तरह लागू किया जाएगा।
देवड़ा ने कहा हम इथेनॉल की कमी का सामना कर रहे हैं और यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि पेट्रोल में पांच प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की अनिवार्यता कब लागू की जा सकती है।
भारतीय चीनी मिल मालिक संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्र शेखर नोपानी ने कहा कि 21.50 रुपए प्रति लीटर की इथेनॉल की कीमत में संशोधन की जरूरत है। उन्होंने कहा हमें भरोसा है कि चालू वित्त वर्ष की मांग पूरी करने का तरीका और रास्ता मिल जाएगा।
इधर पेट्रोलियम सचिव आरएस पांडेय ने इस बात से इन्कार किया कि यदि घरेलू मिल मालिक आवश्यक मात्रा में आपूर्ति नहीं कर पाते तो इथेनॉल का आयात किया जाएगा। उन्होंने कहा यह कार्यक्रम घरेलू किसानों की मदद के लिए बनाया गया था इसलिए इथेनॉल के आयात का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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